रौशनी का त्यौहार: दिवाली पर कविता

दिवाली पर कविता (Poem on Diwali in Hindi): भारत का सबसे प्रिय त्यौहार दिवाली आने ही वाली है. अंधकार पर प्रकाश का विजय यह पर्व लोगों के बिच में प्रेम और एक दुसरे के प्रति स्नेह ले आता है. दिवाली हिन्दू धर्म के लिए सबसे महत्वपूर्ण, पारंपरिक और सांस्कृतिक त्यौहार है जिसको सभी अपने परिवार, मित्र और पड़ोसियों के साथ पुरे उत्साह से मनाते हैं. दिवाली उत्सव है अपने भीतर और बाहर के अंधकार को मिटा के समूचे वातावरण को प्रकाशमय बनाना. इस दिन घरों में, दुकानों तथा प्रतिष्ठानों पर बहुत सारे सजावट और दिये जलाए जाते हैं. बाजारों में खूब चहल पहल रहती है और मिठाई तथा पटाखों की दुकानों में खूब बिक्री होती है.

दिवाली हिन्दू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक माह की अमावस्या को मनाई जाती है और इस साल दिवाली 2018 में 7 नवम्बर को मनाया जायेगा. दिवाली का त्यौहार मनाने का प्रमुख कारण है की इस दिन भगवान राम लंका नरेश रावण पर विजय प्राप्त कर माता सीता और लक्ष्मण सहित 14 वर्ष का वनवास काट कर अयोध्या लौटे थे. उनके अयोध्या आगमन पर अयोध्यावासियों ने भगवान श्री राम के स्वागत के लिए घरों को सजाया व रात्रि में सभी ने अपने घरों में घी के दिये जलाये थे. उसी समय से दीपावली की शुरुआत हुई. इस दिन लोगों द्वारा दीपों व मोमबत्तियाँ जलाने से हुए प्रकाश से कार्तिक मास की अमावस्या की रात पूर्णिमा की रात में बदल जाती है.

दीपावली को धूम धाम से मनाने के लिए हफ़्तों पहले तैयारियाँ आरम्भ हो जाती है. इस त्यौहार पर लोग अपने घरों, कार्यालयों और कामकाज की जगहों को साफ़ करते हैं. लोगों का मानना है की हर जगह दीपक का प्रकाश और घर या कार्यालय के सभी दरवाजे और खिड़कियाँ खोलना देवी लक्ष्मी के घर आने के लिए और आशीर्वाद, धन और समृद्धि देने के लिए रास्ता बना देता है. लोग रंगोली बनाते हैं और अपने रिश्तेदारों और मेहमानों के स्वागात के लिए अपने घरों को सजाते हैं. संध्या का समय आते ही घरों में दीयों, मोमबत्तियों तथा बिजली के रंगीन बल्बों और झालरों से जगमगा उठते हैं. बच्चे अपनी इच्छानुसार बम, फुलझड़ियाँ तथा अन्य पटाखे खरीदते हैं.

दिवाली 5 दिनों का लंबा पर्व है जिसकी शुरुआत धनतेरस से होकर भाई दूज पर समाप्त होती है. दिवाली का त्यौहार भारत देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मनाया जाता है. दुनिया भर में हिन्दू, जैन और सिख समुदाय द्वारा दिवाली जोरों शोरों से मनाया जाता है. भारत में कुछ स्थानों पर दिवाली के दिन नए साल की शुरुआत होती है. कई देशों में इस दिन राष्ट्रीय अवकाश रहता है. बहुत से लोगों के मन में ये सवाल आता है की दिवाली में कितने दिन की छुट्टी मिलती है? दिवाली भले ही 5 दिनों का लंबा पर्व है फिर भी इस में छुट्टी सिर्फ दीपावली के दिन ही मिलती है यानि की सिर्फ एक दिन छुट्टी दी जाती है.

satta market holiday in diwali– इस दिवाली satta market 26 अक्टूबर से लेकर 6 नवम्बर तक बंद रहेगी.

इस लेख के जरिये मै आपके साथ दिवाली पर कविता (Poem on Diwali in Hindi) प्रस्तुत कर रही हूँ, जिनको आप अपने प्रिय मित्रों और सम्बन्धी के साथ शेयर कर सकते हैं तथा बालक अपने कक्षा में भी अद्धयापक और सहपाठियों के सामने प्रस्तुत कर सकते हैं.

दिवाली पर कविता (Poem on Diwali in Hindi)

diwali par kavita hindi

दीपावली का पर्व खुशियों, प्रकाश तथा उजाले का पर्व कहलाता है. यह त्यौहार अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है. भारत के लोगों का विश्वास है की सत्य की सदा जीत होती है और झूठ का सदा नाश होता है. दिवाली पर कवितायेँ सभी लोगों को पसंद आते हैं इसलिए यहाँ पर आप सभी के लिए छोटी व बड़ी कवितायेँ प्रदान की गयी है.

आओ बच्चों मनाये दिवाली

आओ बच्चों मनाये दिवाली,
जिसमें उत्साह एवं उमंग है छाई,
लो दीपों की पंक्तियाँ लग गई,
आशा की नई किरण मन में जग गई.
आओ बच्चों मनाये दिवाली.
दिवाली का अवसर होता है प्यारा,
वर्ष भर से रहता जिसका तुमको इंतज़ार,
नए कपडे पहनकर नाच उठते हो तुम,
कई मिठाइयों को खा कर झूम उठते हो तुम.
आओ बच्चों मनाये दिवाली.
पटाखे होते रंग-बिरंगे, प्यारे-प्यारे,
होते एक से बढ़कर एक और न्यारे-न्यारे,
इन्हें चलाते समय खास सावधानी बरतनी है,
मौज-मस्ती में कतई न तुम्हें लापरवाही करनी है.
आओ बच्चों मनाये दिवाली.
पर सुनो बच्चो एक ख़ास बात,
शायद तुम्हें होगा यह ज्ञात,
प्रदुषण से है यह माहौल बेहाल,
चलो इस पर भी रखें हम थोडा ख्याल.
आओ बच्चों मनाये दिवाली.

दीपों का त्यौहार दिवाली

दीपों का त्यौहार दिवाली,
आओ दीप जलाएँ,
भीतर के अंधियारे को हम
मिलकर दूर भगाएं.
छत पर लटक रहे हैं जो जाले,
इनको दूर हटायें,
रंग-रोगन से सारे घर को
सुन्दर सा चमकाएँ.
अनार, पटाखें, बम, फुलझड़ी,
चकरी खूब चलायें,
हलवा-पूरी, भजिया-मठी
कूद-कूद कर खायें.
सुन्दर-सुन्दर पहन कर कपड़े,
घर-घर मिलने जायें,
इक दूजे में खुशियाँ बाँटें,
अपने सब बन जाएँ.

मन से मन का दीप जलाओ

छोड़-छाड़ के द्वेष भाव को,
मीत प्रीत की रीत निभाओ,
दिवाली के शुभ अवसर पर,
मन से मन का दीप जलाओ…
क्या है तेरा क्या है मेरा,
जीवन चार दिन का फेरा,
दूर कर सको तो कर डालो,
मन का गहन अँधेरा,
निंदा नफरत बुरी आदतों,
से छूटकारा पाओ…
दिवाली के शुभ अवसर पर,
मन से मन का दीप जलाओ…
खूब मिठाई खाओ छक कर,
लड्डू, बर्फी, चमचम, गुझिया..
पर पर्यावरण का रखना ध्यान,
बम कहीं ना फोड़े कान..
वायु प्रदुषण, धुंए से बचना,
रौशनी से घर द्वार को भरना..
दिवाली के शुभ अवसर पर,
मन से मन के दीप जलाओ…
चाँद सूरज से दो दीपक,
तन मन से उजियारा कर दें..
हर उपवन से फूल तुम्हारे
जब तक जियो शान से,
हर सुख, हर खुशाली पाओ,
दिवाली के शुभ अवसर पर,
मन से मन का दीप जलाओ…

खुशियों का संसार दिवाली लायी है

दीपों का त्यौहार दिवाली आई है,
खुशियों का संसार दिवाली लायी है.
घर आँगन सब नया सा लगता है,
नया नया परिधान सभी को फबता है,
नए नए उपहार दिवाली लायी है,
खुशियों का संसार दिवाली लायी है.
दीप सजे जैसे मोती की लड़ियाँ हैं,
नन्हे-नन्हे हाथों में फुलझड़ियाँ हैं,
जलते हुए अनार दिवाली लायी है,
खुशियों का संसार दिवाली लायी है.

दिपावाली का पर्व है मतवाला

सोने की बाती, चाँदी सा उजाला,
दीपावली का पर्व है मतवाला.
बम फटे और चले पटाखे,
रौशनी से मूंद-मूंद गयी आँखे.
अमावस का धुला दाग काला,
दीपावली का पर्व है मतवाला.
फसल आई घर शुभ यही लाभ,
हिसाब नए शुरू यही रंग आम.
बधाई मिठाई का चला है दौर,
साफ़ स्वच्छता है हर ठौर.
नया कैलेंडर ये बतलाता,
दीपावली का पर्व है मतवाला.
दिवाली की रात है आई
दीपों की पंक्ति में हँसती,
दिवाली की रात है आई.
दीपा, राजू ने मिल-जुल कर,
घर, आँगन की करी सफाई.
पूजा की थाली में सजते,
मेवा, कुमकुम, फुल, मिठाई.
फुलझड़ी नाचे मतवाली,
नाचे फिरकी और हवाई.
खिल खिल करके हँसे अनार,
बम्बों ने है धूम मचाई.
पुण्य सदा जीता है जग में,
यही तो है अटल सच्चाई.
प्रेम प्यार का भाव बताती,
दिवाली की रात है आई.

ग़जब की दिवाली

धूम धड़ाका बजे पटाखा
भड़ाम से बोला बम फटा था.
सर्र-सर्र से चक्करी चलती,
फर्र-फर्र फुलझड़ी फर्राटा.
सूँ-सूँ करके साँप जो निकला,
ऐसे लगा, मानो जादू चला था.
फटाक-फटाक चली जो गोली,
ऐसे भी पिस्तौल बना था.
ऐसी ग़जब की हुई दिवाली,
किलकारी का शोर मचा था.
हुर्रे-हुर्रे का शोर मचाकर,
बच्चों का टोला झूम रहा था.
जगमग हो गई दुनिया सारी,
खुशियों का पहिया घूम रहा था.

दिवाली खुशियों का त्यौहार है ये अपने साथ ढेर सारी खुशियाँ लेकर आता है और लोगों के दुख भरे जिंदगी में खुशियों के रंग भर देता है और अपनों को अपने करीब ले कर आता है. मुझे उम्मीद है की आपको ये लेख दिवाली पर कविता (Poem on Diwali in Hindi) पसंद आएगा. इसे अपने सभी मित्रों और रिश्तेदारों के साथ ज्यादा से ज्यादा शेयर करें.

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