दीपों का त्यौहार: दिवाली पर निबंध

दिवाली पर निबंध (Essay on Diwali in Hindi): दिवाली हिंदुस्तान की धरती पर मनाया जाने वाला सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण त्यौहार है. यह पर्व कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है. इस दिन भगवान श्रीराम चौदह वर्ष का वनवास काटकर, वापस अयोध्या पधारे थे. उनके आगमन की ख़ुशी में नगवासियों ने सारे नगर में घी के दीपक जलाये थे और अमावस्या की काली रात भी रोशन हो गयी थी. उनकी याद में आज भी यह त्यौहार बड़े हर्ष और उल्लास से मनाया जाता है. इसे ज्योति पर्व, प्रकाश उत्सव और दीपावली भी कहा जाता है.

दिवाली दशहरा के 20 दिन बाद अक्टूबर या नवम्बर के महीने में आता है. इस दिन चाहे लोग भगवान राम के आगमन को याद न करते हों, परंतु अपने सगे-सम्बन्धियों के यहाँ आना-जाना नहीं भूलते. हिन्दू जन अपने प्रियजनों के घरों में जाकर मिठाई बाँटते हैं. इस प्रकार यह उत्सव आनंद, मिलन, स्नेह और ख़ुशी का त्यौहार है. दिवाली का त्यौहार बच्चों के मन को बहुत भाता है इसलिए आज मै इस लेख के जरिये दिवाली पर निबंध (Essay on Diwali in Hindi) प्रस्तुत कर रही हूँ जिससे बच्चों को दिवाली का इतिहास और महत्व के बारे में जानकारी मिल सके. स्कूल के प्रतियोगिता में भाग लिए हुए विद्यार्थी भी इस निबंध का उपयोग कर सकते हैं.

दिवाली पर निबंध (Essay on Diwali in Hindi)

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दिवाली भारत के सबसे बड़े और प्रतिभाशाली त्यौहार में से एक है. यह त्यौहार अध्यात्मिक रूप से बुराई पर अच्छाई की, अंधकार पर प्रकाश की तथा अज्ञान पर ज्ञान की विजय का त्यौहार है. दीपावली पांच दिनों का एक लम्बा उत्सव है जिसको लोग पुरे आनंद और उत्साह के साथ मनाते हैं. दिवाली के पहले दिन को धनतेरस, दुसरे दिन को छोटा दिवाली, तीसरे दिन को दीपावली या लक्ष्मी पूजा, चौथे दिन को गोवर्धन पूजा तथा पाँचवे दिन को भैया दूज कहते हैं. पुरे भारत में इस पर्व को बड़े धूम धाम से मनाया जाता है. दीयों की जगमगाहट के बिच हर कोई इश्वर से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करता है. पटाखों की आवाज़, मोमबत्ती का प्रकाश यह सब दिवाली की शान है.

दिवाली शब्द दीपावली का लघु रूप है, जिसका शाब्दिक अर्थ है प्रकाश की पंक्ति. यह त्यौहार सारे भारत, नेपाल, सिंगापोर, मलेसिया, श्री लंका, इंडोनेशिया, मारीशस, सूरीनाम, त्रिनिदाद और दक्षिण अफ्रीका में मनाया जाता है. क्या आपको पता है की दुनिया का सबसे बड़ा festival कौन सा है? दिवाली ही एक ऐसा पर्व है जिसे केवल भारत देश में ही नहीं बल्कि पुरे विश्व में धूम धाम से मनाया जाता है इसलिए दिवाली ही है जो दुनिया का सबसे बड़ा festival है. इस त्यौहार को सभी धर्म के लोग मनाना पसंद करते हैं और सबसे ज्यादा सिख, बौद्ध और जैन धर्म के लोग इस त्यौहार को मनाते हैं. यह त्यौहार कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है. इस दिन भगवान श्री राम सीता माता के साथ 14 वर्षों का वनवास काटकर अयोध्या लौटे थे. उसी खुशी में यह त्यौहार मनाया जाता है.

दिवाली कैसे मनाई जाती है? (Diwali Celebration)

दीपावली स्वच्छता व प्रकाश का पर्व है. दीपावली से एक मास पहले पुरे हिन्दुस्तान में मानों सफाई अभियान छिड़ जाता है, सभी महिलाएँ अपने-अपने घरों की पूरी सफाई करती है, रंगोली सजाती हैं. व्यापारी भी अपनी दुकानों, कार्यालयों को झाड-पोछ कर सजाते हैं. इस अवसर पर अनेक लोग अपने घर की पेंटिंग करते हैं और तरह-तरह से घर की सजावट करते हैं. दुकानदार अपनी दुकानों को रंगीन लटकनों से अथवा रौशनी से सजाते हैं. बाज़ार मानो दुल्हन बन जाती है. बच्चे और पुरुष पटाखे लगाकर अपनी खुशियाँ मनाते हैं. लोग इस अवसर पर नए कपड़े, बरतन, मिठाइयाँ आदि खरीदते हैं.
दिवाली की असली रौनक इस रात को जलाये जाने वाले दीपकों और आतिशबाजी से होती है. अंधेरे रात में करोड़ों-करोड़ों दीपक जलते हैं तो अनुपम दृश्य उपस्थित हो जाता है. बच्चे बम, पटाखे, फुलझड़ियाँ, अनार, आतिशबाजी जलाकर खुसी प्रकट करते हैं. इस अवसर पर उनका उत्साह दर्शनीय होता है. इस दिन मिठाई की भी भरमार होती है. दोस्तों और रिश्तेदारों को मिठाइयाँ और उपहार प्रेम के साथ भेंट में दिया जाता है जिससे रिश्ते की डोर और भी मजबूत होती है. भारत के पूर्वी क्षेत्र ओडिशा और पश्चिम बंगाल में हिन्दू लक्ष्मी की जगह काली पूजा करते हैं और इस त्यौहार को काली पूजा कहते हैं. भारत के कुछ पश्चिम और उत्तरी भागों में दिवाली का त्यौहार एक नए हिन्दू वर्ष की शुरुआत का प्रतिक है.

दिवाली का महत्व (Importance of Diwali)

भारतवर्ष में मनाये जाने वाले सभी त्योहारों में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टी से अत्यधिक महत्व है. इसे दीपोत्सव भी कहते हैं. दीपावली की रात सभी हिन्दू लक्ष्मी-पूजन करते हैं. ऐसी मान्यता है की इस रात स्वयं लक्ष्मी गृह में प्रवेश करती है. इसलिए कई भक्त तो अपने घर के द्वार रात को खुले रखते हैं. व्यापारी-वर्ग इस दिन अपने व्यापार-स्थल पर लक्ष्मी पूजन करके “शुभ-लाभ” के चिह्न अंकित करते हैं. अपने सुनहरे भविष्य और समृद्धि के लिए लोग लक्ष्मी देवी की पूजा करते हैं. देवी लक्ष्मी की पूजा के बाद आतिशबाजी का दौर शुरू होता है. इस दिन लोग बुरी आदतों को छोड़कर अच्छी आदतों को अपनाते हैं.

इस दिन हजारों लोग सोने के गहने, बरतन, कपडा और दूसरी चीजें खरीदते हैं. दुकानदारों और व्यापारियों के लिए यह त्यौहार प्रमुख है क्यूंकि इस दिन बिक्री सबसे अधिक होती है. इस त्यौहार पर खर्च और खरीद को शुभ माना जाता है क्यूंकि लक्ष्मी को धन, समृद्धि और निवेश की देवी माना जाता है. इस दिन धन के देवता ‘कुबेर’ की भी पूजा की जाती है.

दिवाली कब है?

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार दिवाली अश्र्विन के महीने में कृष्ण पक्ष की 13वें चन्द्र दिन पर मनाया जाता है. यह परम्परागत रूप से हर साल मध्य अक्टूबर या नवम्बर में दशहरा के 20 दिन के बाद मनाया जाता है. इस साल दिवाली 2018 में 7 नवम्बर बुधवार को मनाया जायेगा. इसके पश्चात धनतेरस 5 नवम्बर सोमवार को, नरक चतुर्दशी यानि छोटी दिवाली 6 नवम्बर मंगलवार को मनाया जायेगा. उसके बाद लक्ष्मी पूजा जो की मुख्य दिवाली होती है उसे 7 नवम्बर बुधवार को, बाली प्रतिपदा या गोवेर्धन पूजा 8 नवम्बर गुरुवार को और अंत में भाई दूज 9 नवम्बर शुक्रवार को मनाया जायेगा.

दिवाली के त्यौहार पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाता है ताकि सभी अपने मित्रों और परिवार के साथ त्यौहार का आनंद ले सकें. कई क्षेत्रों में दिवाली के मौके पर व्यापारियों या कार्यकर्ताओं को उनके कंपनी द्वारा बोनस भी प्रदान किया जाता है. कॉलेज के छात्र अपने परिवार के सदस्यों, दोस्तों और रिश्तेदारों को दिवाली की शुभकामनाएं whatsapp और दुसरे social networking sites के जरिये भेजते हैं.

दिवाली क्यों मनाते हैं तथा दिवाली का इतिहास

अन्य त्योहारों की तरह दिवाली के साथ भी कई धार्मिक तथा एतिहासिक कथाएँ जुडी हुई हैं. हम सब हर साल बड़े ही धूम धाम से इस पर्व को मनाते हैं लेकिन इसे मनाने के पीछे का कारण क्या है इसका ज्ञान सबको नहीं होता. इसलिए आज मै आपको दिवाली से सम्बंधित ऐसी कहानियां बताउंगी जिससे आपको ये पता चल जायेगा की आखिर हम ये पर्व क्यूँ मनाते हैं.

1. श्री राम के वनवास से अयोध्या लौटने की ख़ुशी में

यह कहानी सभी भारतीयों को पता है की हम दिवाली श्री राम जी के वनवास से लौटने की ख़ुशी में मनाते हैं. मंत्रा के गलत विचारों से पीड़ित होकर भरत की माता कैकेई श्रीराम को उनके पिता दशरथ से वनवास भेजने के लिए वचनवद्ध कर देती है. ऐसे में श्री राम अपने पिता के आदेश को सम्मान देते हुए माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष के वनवास के लिए निकल पड़ते हैं. वहीँ वन में रावण माता सीता का छल से अपहरण कर लेता है. तब श्री राम सुग्रीव के वानर सेना और प्रभु हनुमान के साथ मिल कर रावण का वध करके सीता माता को छुड़ा लाते हैं. उस दिन को दशहरे के रूप में मनाया जाता है और जब श्री राम अपने घर अयोध्या लौटते हैं तो पुरे राज्य के लोग उनके आने की ख़ुशी में रात्रि के समय दीप जलाते हैं और खुशियां मनाते हैं. तब से यह दिन दीपावली के नाम से जाना जाता है.

2. पांडवों का अपने राज्य में वापस लौटना

आप सभी ने महाभारत की कहानी तो सुनी ही होगी. कौरवों ने, शकुनी मामा के चाल की मदद से शतरंज के खेल में पांडवों का सब कुछ छीन लिया था. यहाँ तक की उन्हें राज्य छोड़ कर 13 वर्ष के लिए वनवास भी जाना पड़ा. इसी कार्तिक अमावस्या को वो 5 पांडव 13 वर्ष के वनवास से अपने राज्य लौटे थे. उनके लौटने की ख़ुशी में उनके राज्य के लोगों ने दीप जला कर खुशियाँ मनाई थी.

3. भगवन श्री कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का किया था संहार

मुख्य दिवाली से एक दिन पहले के दिन नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है. इसी दिन प्रभु श्री कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था. नरकासुर उस समय प्रागज्योतिषपुर का राजा था. नरकासुर इतना क्रूर था की उसने देवमाता अदिति के शानदार बालियों तक को छीन लिया. देवमाता अदिति श्री कृष्ण की पत्नी सत्यभामा की सम्बन्धी थी. नरकासुर ने कुल 16 भगवान की कन्याओं को बंधित कर रखा था. श्री कृष्ण की मदद से सत्यभामा ने नरकासुर का वध किया और सभी देवी कन्याओं को उसके चंगुल से छुड़ाया. उसी दिन से यह बुराई सत्ता पर सत्य की विजय का उपलक्ष्य में मनाया जाता है.

4. देवी लक्ष्मी का जन्मदिन

हर बार दीपावली का त्यौहार हिंदी कैलेंडर के अनुसार कार्तिक महीने के अमावस्या के दिन मनाया जाता है. इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी जी ने सृष्टि में अवतार लिया था. माता लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी माना जाता है. इसलिए घर में दीप जलाने के साथ साथ हम माता लक्ष्मी जी की पूजा भी करते हैं. यही कारण है की यह दिन माता लक्ष्मी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में दिवाली के त्यौहार के रूप में मनाना शुरू कर दिया. यह भी दीपावली मनाने का एक मुख्य कारण है.

5. राजा विक्रमादित्य का हुआ था राज्याभिषेक

राजा विक्रमादित्य प्राचीन भारत के एक महान सम्राट थे. वे एक बहुत ही आदर्श राजा थे और उन्हें उनके उदारता, साहस तथा विद्वानों के संरक्षणों के कारण हमेसा जाना जाता है. इसी दिवाली अमावस्या को उनका राज्याभिषेक हुआ था. राजा विक्रमादित्य मुघलों को धुल चटाने वाले भारत के अंतिम हिन्दू सम्राट थे.

6. भगवान विष्णु ने देवी लक्ष्मी को बचाया

हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक महान दानव राजा बाली था, जो सभी तीनो लोक पृथ्वी, आकाश और पाताल का मालिक बनना चाहता था, उसे भगवान विष्णु से असीमित शक्तियों का वरदान प्राप्त था. पुरे विश्व में केवल गरीबी थी क्यूंकि पृथ्वी का सम्पूर्ण धन राजा बाली द्वारा रोका हुआ था. भगवान के बनाये ब्रह्माण्ड के नियम जारी रखने के लिए भगवान विष्णु ने सभी तीनो लोकों को बचाया था और देवी लक्ष्मी को उसकी चंगुल से छुड़ाया था. तब से यह दिन बुराई की सत्ता पर भगवान की जीत और धन की देवी को बचने के रूप में मनाया जाना शुरू किया गया.

यूँ तो दिवाली आतिशबाजी के चमक और शोर से पुरे दुनिया को प्रकाशित करता है परन्तु इसका ज्यादा उपयोग करना हमारे प्रकृति के लिए बहुत ही हानिकरक साबित होता है. क्यूंकि इन पटाखों के जलने पर निकलने वाले धुंए हमारे आस पास के वातावरण को प्रदूषित करते हैं जो ना ही प्रकृति के लिए अच्छा होता है और ना ही हमारे सेहत के लिए. साथ ही साथ इसे खरीदने में बहुत पैसे भी व्यर्थ हो जाते हैं इसलिए इस दिवाली को हम या तो पर्यावरण के अनुकूल वाले पटाखें जलाएंगे या फिर उन पैसो को हम गरीबों को बाँटेंगे. इससे उनकी खुसी भी दुगनी होगी और बदले में वो हमें ढेर सारी दुआएं भी देंगे. मुझे उम्मीद है की आपको ये लेख दिवाली पर निबंध (Essay on Diwali in Hindi) पसंद आएगा. इस लेख को अपने दोस्तों और सगे-सम्बन्धियों के साथ ज्यादा से ज्यादा शेयर करें.

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