दशहरा पर कविता: बुराई पर अच्छाई की जीत

दशहरा पर कविता (Poem on Dussehra in Hindi): दशहरा का त्यौहार ख़ुशी और उमंग का त्यौहार है. दशहरा शब्द का मतलब ‘दश-हर’ अर्थात दस बुराइयों पर जीत, इसलिए इसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतिक माना जाता है. दशहरा का त्यौहार सम्पूर्ण भारत में उत्साह और धार्मिक निष्ठा के साथ मनाया जाता है. दशहरा भारत देश में अलग-अलग नाम से जाना जाता है जैसे ‘विजयदशमी’, ‘दुर्गा पूजा’, ‘महा नवमी’ इत्यादि. दशहरा हर साल दीपावली से 20 दिन पहले सितम्बर या अक्टूबर के महीने में पड़ता है. दशहरा 2018 में 19 अक्टूबर को मनाया जायेगा.

दशहरा का एतिहासिक मान्यताओं और प्रसिद्ध हिन्दू धर्मग्रन्थ रामायण के अनुसार ऐसा उल्लिखित है की भगवन राम ने रावण को मारने के लिए देवी चंडी की पूजा की थी. लंका के दस सिर वाले राक्षस राजा रावण ने अपनी बहन शूर्पनखा की बेइज्जती का बदला लेने के लिए राम की पत्नी माता सीता का हरण कर लिया था. तब से जिस दिन से भगवन राम ने रावण का वध किया उसी दिन से दशहरा उत्सव मनाया जा रहा है.

कुछ लोग का यह मानना है की माँ दुर्गा ने महिषासुर से लगातार नौ दिनों तक युद्ध करके दशहरे के दिन ही उस राक्षस का वध किया. विजयदशमी भगवन राम की रावण पर विजय के रूप में मनाया जाए अथवा दुर्गा पूजा यानी माँ दुर्गा का महिषासुर पर विजय के रूप में, दोनों ही रूपों में यह शक्ति पूजा का पर्व है.

भारत में हर पर्व को लोग पुरे जोश और खुसी के साथ मनाते हैं. दशहरा पर्व में बड़े बड़े मेलों का भी आयोजन किया जाता है. दशहरा का पर्व हर एक के जीवन में बहुत महत्व रखता है, इस दिन लोग अपने अन्दर की भी बुराइयों को खत्म करके नई जीवन की शुरुआत करते हैं. दशहरा त्यौहार जश्न के रूप में मनाया जाने वाला त्यौहार है. सबकी जश्न की अपनी अपनी मान्यताएं हैं- किसानों के लिए फसल को घर लाने का जश्न, बच्चों के लिए राम द्वारा रावण के वध का जश्न, बड़ों द्वारा बुराई पर अच्छाई का जश्न आदि. यह पर्व बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है.

दशहरा में नौ दिनों तक रामलीला का आयोजन छोटे-बड़े सभी शहरों में अत्यंत श्रद्धा एवं भक्ति के साथ किया जाता है. विजयदशमी के दिन रावण के पुतलों के साथ-साथ कुम्भकर्ण और मेघनाथ के पुतले भी जलाये जाते हैं. रावण के पुतले का दहन कर, लोग बुराइयों से दूर रहने का संकल्प लेते हैं. दशहरा में नवरात्री भी मनाई जाती है. नवरात्र अर्थात दुर्गापूजन में भक्त पूजा आराधना में नव दिनों तक नवरात्री उपवास रखते हैं. नव दिनों तक अखण्ड ज्योति-दीप प्रज्वल्लित करते हैं. ज्योति-दीप जला लिए घी का दिया बनाना जरुरी होता है.

ऐसा माना जाता है की घी का दीपक जलाने से वातावरण में सकारात्मकता आती है और दीपक का प्रकाश जितनी जगह पर जाता है वहां से नकारात्मकता दूर हो जाती है. शास्त्रों में दीपक जलाने के लिए ख़ासतौर से घी का उपयोग करने को ही तवज्जो दी जाती है, जिसका एक कारण है की घी को पवित्र माना जाता है. इसलिए गाय के दूध से बना हुआ घी का दिया जलना उत्तम माना जाता है.

घी का दिया बनाये- घी का दिया बनाने के लिए दूध को गर्म कर उसे ठंडा होने के लिए रख लें, ठंडा होने के बाद जो मलाई दूध के ऊपर जम जाती है उसे अलग कर बरतन में रख लें. कुछ दिन तक इसी प्रक्रिया में मलाई जमा करते रहे. जब मलाई एक बड़ी मात्रा में जमा हो जाये तो फिर उसे एक बड़े से पैन में डालकर गैस पर पिघलने के लिए रख दें. थोड़ी देर के बाद आप देखेंगे की घी, मलाई से अलग होने लगेगा. उस घी को एक जार में इकठ्ठा कर लें और उसी पवित्र घी का इस्तेमाल पूजा के समय दीप जलने के लिए करें.

दशहरा पर कविता (Poem on Dussehra in Hindi)

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दशहरा पर बच्चो की स्कूल की छुट्टी दी जाती है और इस छुट्टी में उन्हें होमवर्क के तौर पर दशहरा के ऊपर विभिन्न प्रकार की चीजें लिखने को दिया गया रहता है. इसलिए मैंने यहाँ दशहरा पर कविता (Poem on Dussehra in Hindi)प्रस्तुत किया है जो विद्यार्थियों के प्रयोग में आ सकते हैं.

“फिर हमें संदेश देने
आ गया पावन दशहरा
संकटों का तम घनेरा
हो न आकुल मन ये तेरा
संकटों के तम छटेंगें
होगा फिर सुंदर सवेरा
धैर्य का तू ले सहारा
द्वेष हो कितना भी गहरा
हो न कलुषित मन यह तेरा
फिर से टूटे दिल मिलेंगें
होगा जब प्रेमी चितेरा
फिर हमें संदेश देने
आ गया पावन दशहरा

बन शमी का पात प्यारा
सत्य हो कितना प्रताड़ित
रूप उसका और निखरे
हो नहीं सकता पराजित
धर्म ने हर बार टेरा
फिर हमें संदेश देने
आ गया पावन दशहरा”

“दशहरा का तात्पर्य, सदा सत्य की जीत।
गढ़ टूटेगा झूठ का, करें सत्य से प्रीत॥
सच्चाई की राह पर, लाख बिछे हों शूल।
बिना रुके चलते रहें, शूल बनेंगे फूल॥
क्रोध,कपट,कटुता,कलह,चुगली अत्याचार।
दगा, द्वेष, अन्याय, छल, रावण का परिवार॥
राम चिरंतन चेतना, राम सनातन सत्य।
रावण वैर-विकार है, रावण है दुष्कृत्य॥
वर्तमान का दशानन, यानी भ्रष्टाचार।
आज दशहरा पर करें, हम इसका संहार॥”

“विजय सत्य की हुई हमेशा,
हारी सदा बुराई है,
आया पर्व दशहरा कहता
करना सदा भलाई है.
रावण था दंभी अभिमानी,
उसने छल -बल दिखलाया,
बीस भुजा दस सीस कटाये,
अपना कुनबा मरवाया.
अपनी ही करनी से लंका
सोने की जलवाई है.
मन में कोई कहीं बुराई
रावण जैसी नहीं पले,
और अँधेरी वाली चादर
उजियारे को नहीं छले.
जिसने भी अभिमान किया है,
उसने मुँह की खायी है.
आज सभी की यही सोच है,
मेल -जोल खुशहाली हो,
अंधकार मिट जाए सारा,
घर घर में दिवाली हो.
मिली बड़ाई सदा उसी को
जिसने की अच्छाई है.”

“विजयादशमी विजय का, पावन है त्यौहार।
जीत हो गयी सत्य की, झूठ गया है हार।।
रावण के जब बढ़ गये, भू पर अत्याचार।
लंका में जाकर उसे, दिया राम ने मार।।
विजयादशमी ने दिया, हम सबको उपहार।
अच्छाई के सामने, गयी बुराई हार।।
मनसा-वाता-कर्मणा, सत्य रहे भरपूर।
नेक नीति हो साथ में, बाधाएँ हों दूर।।
पुतलों के ही दहन का, बढ़ने लगा रिवाज।
मन का रावण आज तक, जला न सका समाज।।
राम-कृष्ण के नाम धर, करते गन्दे काम।
नवयुग में तो राम का, हुआ नाम बदनाम।।
आज धर्म की ओट में, होता पापाचार।
साधू-सन्यासी करें, बढ़-चढ़ कर व्यापार।।‘
आज भोग में लिप्त हैं, योगी और महन्त।
भोली जनता को यहाँ, भरमाते हैं सन्त।।
जब पहुँचे मझधार में, टूट गयी पतवार।
कैसे देश-समाज का, होगा बेड़ा पार।।”

“देखो दशहरा का त्यौहार आया है,
लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाया है.
आओ सब मिलकर मिटायें अँधियारा,
चारो और फैलाएं अच्छाई का उजियारा.
साथ मिलकर खुशियों का यह त्यौहार मनाएं,
सब मिलकर खुशियों की दीप जलाएं.
देखो चारो और फैला हुआ यह अनोखा उमंग,
कैसे फिजा में बिखरे हुए हैं ये मनमोहक रंग.
दशहरा है बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतिक,
इस दिन लोग गाते हैं खुशियों के नए गीत.”

मुझे उम्मीद है की आपको ये कवितायेँ पसंद आएँगी. यहाँ पर मैंने कविताओं के साथ साथ दशहरा का महत्व भी बताया है. अगर आपको ये लेख दशहरा पर कविता (Poem on Dussehra in Hindi) या दशहरा गीत  अच्छा लगा तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करें.

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