जवाहर लाल नेहरू का जीवन परिचय

जवाहर लाल नेहरु का जीवन परिचय (Biography of Jawaharlal Nehru in Hindi): पंडित जवाहर लाल नेहरु, ये वो नाम है जिसके लिए मुझे आप सभी को परिचय कराने की आवस्यकता नहीं. इनका नाम देश का हर बच्चा बच्चा जानता है. जवाहर लाल नेहरु जी आज़ाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे. भारत में बहुत से महान व्यक्तियों ने जन्म लिया और नेहरु जी उनमे से एक थे. नेहरु को बच्चों से बेहद प्यार था और वो गरीब लोगों के भी हमदर्द और दोस्त थे. वो खुद को भारत का सच्चा सेवक मानते थे. भारत को अंग्रेजों के गुलामी से आजादी दिलाने वाले महापुरुषों में से एक जवाहर लाल नेहरु भी थे.

भारत को एक सफल राष्ट्र बनाने के लिए पंडित नेहरु ने दिन रात कड़ी मेहनत की थी. वो आज़ाद भारत के पहले प्रधानमंत्री बने इसलिए उन्हें आधुनिक भारत का निर्माता भी कहा जाता है. 1947 से 1964 तक देश के प्रथम और लंबी अवधि तक प्रधानमंत्री होने का गौरव नेहरु जी को ही हासिल है. पंडित जवाहर लाल नेहरु एक महान व्यक्ति, नेता, राजनीतिज्ञ, लेखक और सच्चे देशभक्त थे. बच्चे उन्हें “चाचा नेहरु” कहकर पुकारते हैं. आज के इस लेख में मैं आपको इसी महान व्यक्ति जवाहर लाल नेहरु का जीवनी (Jawaharlal Nehru Biography) प्रस्तुत कर रही हूँ जिसमे आपको जवाहर लाल नेहरु के बारे में काफी जानकारियां हासिल होंगी.

जवाहर लाल नेहरु का जीवन परिचय (Biography of Jawaharlal Nehru in Hindi)

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जवाहर लाल नेहरु भारत के पहले प्रधानमंत्री और स्वतंत्रता के पहले और बाद में भारतीय राजनीती के मुख्य केंद्र बिंदु थे. वे महात्मा गांधी के सहायक के तौर पर भारतीय स्वतंत्रता अभियान के मुख्य नेता थे जो अंत तक भारत को स्वतंत्र बनाने के लिए लड़ते रहे. ब्राह्मण संप्रदाय से होने के कारन उन्हें “पंडित नेहरु” भी कहा जाता था.

जवाहर लाल नेहरु का इतिहास (History of Jawaharlaal Nehru in Hindi)

जवाहर लाल नेहरु जी का जन्म 14 नवम्बर 1889 को इलाहबाद में हुआ था. इनका जन्म कश्मीरी ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उनके पिता मोतीलाल नेहरु इलाहबाद के बेहद रईस, विख्यात और सफल वकील थे जो कश्मीरी पण्डित समुदाय से थे, स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दो बार अध्यक्ष चुने गए थे. उनकी माता का नाम श्रीमती स्वरुपरानी थुस्सू था. नेहरु जी के दो बेहनें थी जिनका नाम, विजया लक्ष्मी और कृष्ण हठीसिंग है. विजया लक्ष्मी जी राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष बनी थी और कृष्ण हठीसिंग जी एक उल्लेखनीय लेखिका थी जिन्होंने अपने परिवार जनों से सम्बंधित कई पुस्तकें लिखीं.

चाचा नेहरु की प्रारंभिक शिक्षा घर में ही बेहद सक्षम शिक्षकों से प्राप्त की. 15 वर्ष की उम्र में नेहरु जी को उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए इंग्लैंड के हैरो स्कूल में भेज दिया गया. हैरो में दो वर्ष रहने के बाद नेहरु जी केंब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज से अपनी पढाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने अपने पिता की तरह कानून की पढाई यानि लॉ (Law) की डिग्री कैम्ब्रिज विश्वविध्यालय से पूरी की औए बाद में वो एक वकील बने. 1912 में नेहरु जी भारत लौटे और उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट से अपनी वकालत शुरू की. 27 वर्ष की उम्र में 1916 में नेहरु जी ने कमला कौल से शादी की और 1917 में इंदिरा प्रियदर्शनी के रूप में एक बेटी के पिता बने.

जवाहर लाल नेहरु का राजनीतिक जीवन

गुलामी के दौरान उन्होंने देखा की अंग्रेज़ भारत के लोगों के साथ बहुत बुरा व्यवहार कर रहे हैं. उन्होंने इंग्लैंड का स्वतंत्र वातावरण देखा था, उसकी तुलना में भारत दिन-हिन देश था. अमृतसर के दुःख भरे जलियावाला बाग़ हत्याकांड के बाद नेहरु जी स्वयं को रोक ना सके और तभी उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ने का फैसला किया. 1917 में जवाहर लाल नेहरु जी होम रुल लीग में शामिल हो गए. राजनीती में उनका असल प्रवेश दो साल बाद 1919 में हुई जब वे महात्मा गाँधी के संपर्क में आए. उस समय महात्मा गाँधी ने रॉलेट अधिनियम के खिलाफ एक अभियान शुरू किया था. नेहरु ने महात्मा गाँधी के उपदेशों के अनुसार अपने परिवार को भी ढाल लिया.

नेहरु और उनके पिता ने विदेशी वस्तुओं का त्याग करके खादी को अपना लिया और 1920 से 1922 के बिच गाँधी जी के असहयोग आंदोलन में भी सक्रिय रूप से भाग लिया और इस दौरान वो कई बार जेल गए लेकिन कभी भी इससे परेशान नहीं हुए और अंग्रेजों की हर सजा के बावजूद भी वो ख़ुशी से अपनी लड़ाई को जारी रखते थे. सन 1929 में लाहौर अधिवेशन में जवाहर लाल जी कांग्रेस के अध्यक्ष बने. नेहरु जी ने इस अधिवेशन में “पूर्ण स्वराज” की माँग की. अपनी कार्य क्षमता और सूझ बुझ से उन्होंने कांग्रेस को नई दिशा दी. 26 जनवरी 1930 को लाहौर में जवाहर लाल नेहरु ने स्वतंत्र भारत का झंडा फहराया.

नेहरु जी ने 1942 के “भारत छोडो” आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की और तिन वर्ष तक कारावास में रहे. 1947 में भारत और पाकिस्तान के विभाजन और आज़ादी के मुद्दे पर अंग्रेजी सरकार के साथ हुई वार्ताओं में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. अंततः अंग्रेज़ सरकार ने भारत को स्वतंत्र करने का निर्णय लिया और 15 अगस्त 1947 के दिन भारत अंग्रेजी की दो सौ वर्षों की गुलामी को पछाड़ कर स्वतंत्र राष्ट्र बन गया. नेहरु जी स्वतंत्र राष्ट्र के प्रथम प्रधानमंत्री बने.

आज़ाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री

नेहरु जी ने प्रधानमंत्री के रूप में देश को नई दिशा प्रदान की. प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए पंडित नेहरु देश के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण काम किये इसके साथ ही उन्होंने मजबूत राष्ट्र की नींव रखी और भारत को आर्थिक रूप से मजबूती भी देने में अहम् भूमिका निभाई. उन्होंने भारत में आधुनिक उद्योगों की आधारशिला रखी. आज के भारत की औद्योगिक उन्नति उनके सुकर्मों का फल ही है. साथ ही उन्होंने किसानों को जल की उपलब्धता सुनिश्चित करवाने के लिए नदी-घाट परियोजनाओं का आरंभ करवाया. उन्होंने पंचवर्षीय योजनाओं के द्वारा देश के समग्र विकास का प्रयास किया. वे भारत को आत्मनिर्भर बनाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने शहरों के विकास के साथ-साथ गोंवों के विकास पर भी पर्याप्त बल दिया.

देश के नौजवानों को कर्मठ बनने की प्रेरणा देने के लिए उन्होंने नारा दिया- ‘आराम हराम है’. उनकी उपलब्धियों एवं देश के प्रति उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें सन 1995 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया. उन्हें बच्चों से बहुत लगाव था तथा बच्चों में वे चाचा नेहरु के रूप में प्रसिद्ध थे, इसलिए उनके जन्मदिन 14 नवम्बर को ‘बाल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है.

जवाहर लाल नेहरु पुस्तकें

नेहरु जी न केवल एक महान राजनेता थे बल्कि वे एक महान लेखक भी थे. इसका प्रमाण उनके द्वारा रचित पुस्तकें- ‘Discovery of India’ एवं ‘Glimpses of World History’ है. उनकी आत्मकथा 1936 ई. में प्रकाशित हुई और संसार के सभी देशों में उसका आदर हुआ. इसके अतिरिक्त अपनी पुत्री इंदिरा प्रियदर्शनी को नैनी जेल से लिखे गए उनके पत्रों का संकलन ‘पिता का पत्र पुत्री के नाम’ नामक पुस्तक के रूप में प्रकाशित है.

जवाहर लाल नेहरु की मृत्यु

नेहरु जी शांति के मसीहा थे, उन्होंने पंचशील सिद्धांत के साथ चीन की ओर मित्रता का हाथ बढ़ाया, लेकिन 1962 ई. में चीन ने धोखे से भारत पर आक्रमण कर दिया. नेहरु जी के लिए यह एक बड़ा झटका था. भारतीय सेना इस युद्ध के लिए तैयार नहीं थी. अतः भारत को इस युद्ध में हार का सामना करना पड़ा. इस घटना के बाद से नेहरु जी के स्वास्थ्य में गिरावट के लक्षण दिखाई देने लगे. उन्हें 27 मई 1964 में दिल का दौरा पड़ा और उन्होंने सदा के लिए अपनी आँखें बंद कर ली. उनकी मौत भारत देश के लिए एक बहुत बड़ी क्षती थी. देश के महान नेताओं व स्वतंत्रता संग्रामी के रूप में उन्हें आज भी याद किया जाता है.

जवाहर लाल नेहरु के विचार

  1. मनुष्य की नागरिकता देश की सेवा में निहित है.
  2. पंडित जी कहते थे, कार्य को प्रभावी होने के लिए उसे स्पष्ट लक्ष्य की तरह निर्देशित किया जाना चाहिए.
  3. अज्ञानता (किसी भी जानकारी का कम होना) किसी भी बदलाव से हमेसा डरती है.
  4. किसी को भी असफलता तभी मिलती है जब अपने आदर्शों और लक्ष्य यह सिद्धांतों को भूल जाता हैं.
  5. असफलता तभी होती है जब हम अपने आदर्शों, उद्देश्यों और सिद्धांतों को भूल जाते हैं.
  6. दुसरे हमारे बारे में क्या सोचते हैं, उससे कहीं अधिक ये मायने रखता है की हम वास्तव में हैं क्या.
  7. संस्कृति मन और आत्मा का विस्तार है.
  8. संकट में हर छोटी सी बात का महत्व होता है.
  9. दुसरों के अनुभवों से लाभ उठाने वाला बुद्धिमान होता है.
  10. जो पुस्तकें हमें सोचने के लिए विवश करती हैं, वे हमारी सबसे अधिक सहायक हैं.

पंडित जवाहर लाल नेहरु जी एक महान नेता ही नहीं बल्कि एक सच्चे और अच्छे इंसान भी थे. लोगों के लिए उनके स्नेह एवं बच्चों के प्रति उनका प्यार ने उन्हें बहुत लोकप्रिय बना दिया. वह राष्ट्र की एकता एवं व्यक्ति की स्वतंत्रता में विश्वास रखते थे. चाचा नेहरु का स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान, देश की आज़ादी और उसके बाद की प्रगति के योगदान के लिए हमेसा याद किया जायेगा. मुझे उम्मीद है की आपको ये लेख जवाहर लाल नेहरु का जीवन परिचय (Biography of Jawaharlal Nehru in Hindi) और जवाहर लाल नेहरु के बारे में जितनी भी जानकारी दी गयी है आपको पसंद आएगा.

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