Short Stories in Hindi with Moral for Kids

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Hindi short stories with moral for Kids: कहानियाँ एक बड़ा ही मजेदार जरिया है बच्चों को जीवन का सबक सिखाने का और छोटे छोटे प्रेरणादायक कहानियों में बड़ी ताकत होती है, इनकी ख़ास बात ये होती है की ये पढने में भी आसान होते हैं और अंत में हमेसा कुछ न कुछ इन कहानियों से सिख जरुर मिलती है.

बच्चों को कहानियाँ भाती है, सभी बच्चे अलग अलग वजहों से कहानियों के मज़े लेते हैं. किसी को जादुई दुनिया वाली कहानियाँ सुनना पसंद है, किसी को कहानियों के जरिये नयी नयी चीजें जानना अच्छा लगता है तो किसी को भूतों की डरावनी कहानी सुनने में मज़ा आता है.

ये सारी Hindi short stories for kids अगर घर के बुजुर्ग यानि दादा-दादी या नाना-नानी से सुना जाये तो वो और भी रोमांचक लगता है. बच्चों को जीवन में सही राह पर चलने, जरूरतमंद की मदद करने और कभी झूठ ना बोलने की प्रेरणा कहानियों के जरिये ही दिया जा सकता है.

बच्चे मन के सच्चे होते हैं वो वही करते या कहते हैं जो उन्हें सिखाया जाता है फिर चाहे वो बातें अच्छी हो या फिर बुरी.

इसलिए आज मै आपके लिए Hindi Short Stories लेख से ऐसी प्रेरणादायक कहानियाँ लेकर आई हूँ जिसे आप अपने बच्चों को रात में सोने से पहले सुना सकते हैं या कहीं सफ़र में जा रहे हों तो भी सुना सकते हैं जिससे यक़ीनन उन्हें नयी प्रेरणा मिलेगी और जीवन को सही तरीके से जीने का सिख मिलेगा जो उन्हें भविष्य में बेहतर इंसान बनाने में मदद करेंगे.

10 Very Short Stories in Hindi with Moral (2020)

Short Stories in Hindi with Moral for Kids
Hindi Short Stories

आज मै जो कहानियाँ बताने जा रही हूँ वो आप में से बहुत लोगों ने कहीं ना कहीं सुना होगा और पढ़ा भी होगा. ये कहानियाँ ऐसी है जिनसे केवल बच्चों को ही नहीं बल्कि बड़े लोगों को भी कुछ ना कुछ नया सिखने को मिलेगा. चलिए इन छोटे कहानियों का सिलसिला शुरू करते हैं.

यह सब कहानियों आप Class 1, Class 2, Class 3, Class 4, Class 5, Class 7 और Class 8 के बच्चों को सुना सकते है.

1. मिदास का स्पर्श: Short Stories in Hindi with Morals

प्राचीन ग्रीस देश में एक राजा रहा करता था. उसका नाम था “मिदास”. उसके पास सोने की बहुत सारी चीजें थी और वो सब कुछ था जो उसे चाहिए था. उसकी एक खुबसूरत सी बेटी भी थी. मिदास को अपनी सोने की चीजों से बहुत लगाव था लेकिन इन कीमती चीजों से ज्यादा वो अपनी बेटी को प्यार करते था.

एक दिन एक सिलेनुस नाम का शराबी बुढा शराब पीकर राजा मिदास के गुलाब के बगीचे में घुश गया और वहीँ बेहोश हो गया. राजा का मानना था की सिलेनुस हमेसा जहाँ भी जाता है अपने साथ luck लेकर आता है जिससे दूसरों का भला होता है इसलिए मिदास ने शराबी सिलेनुस को जबतक होश नहीं आ जाता तब तक उसीके महल में आराम करने की जगह दे दी.

राजा के इस फैसले पर उनकी पत्नी और बेटी उनसे राज़ी नहीं थे फिर भी मिदास ने सिलेनुस को रहने को कहा. सिलेनुस का मित्र डायोनिसस था जो शराब और उत्सव का देवता था. जब डायोनिसस ने देखा की मिदास उसके मित्र सिलेनुस को अपने घर में आराम करने की जगह दी तो डायोनिसस इस बात से खुश होकर राजा को इसका इनाम देने का निर्णय किया.

जब डायोनिसस ने मिदास से कुछ भी wish माँगने को कहा तो मिदास ने डायोनिसस से कहा, “मैं चाहता हूँ की मैं जो भी वस्तु का स्पर्श करूँ वो सोने में बदल जाये.” डायोनिसस को मिदास की ये इच्छा पूरी करनी पड़ी ये जानते हुए भी उसका ये लालच उसके लिए मुसीबत बन सकता है.

मिदास की इच्छा पूरी होने की वजह से वो ख़ुशी के मारे पागल सा हो गया और इधर उधर हाथ में जो भी सामान आता उसे छू कर वो सोने में बदल देता. उसने अपने बाग और महल को पूरी तरह से सोने का महल बना दिया. हर जगह सोना ही सोना देखकर मिदास बहुत खुश हुआ.

आनंद में लीन होकर जब मिदास अपने बेटी के पास गया और उसे प्यार से गले लगा लिया तब उसे एहसास हुआ की उसकी बेटी सोने की मूर्ति बन चुकी है. अपनी बेटी को इस हालत में देख मिदास पागल सा हो गया और भागते हुए अपने बगीचे में पहुँच गया जहाँ पर उसे डायोनिसस से वरदान मिला था.

उसने डायोनिसस को पुकारा और उनसे अपना वरदान वापस लेने और उसकी बेटी को बचाने की विनती की. डायोनिसस ने अपना दिया हुआ वरदान वापस लिया और मिदास की बेटी को फिर से इंसान बना दिया. उस दिन मिदास ने अपनी गलती से सबक सिखा.

सिख- इस कहानी से हमें ये सिख मिली की कभी किसी चीज का लालच नहीं करना चाहिए. हमारे पास जितना है हमें उसी में ही खुश रहना चाहिए और लालच में ज्यादा की खवाइश नहीं करनी चाहिए.

2. नन्हा खरगोश: Short Stories in Hindi for Kids

जंगल में एक बड़ा भयानक शेर रहता था. उसकी बड़ी-बड़ी मूँछ व पूँछ थी. जब वह दहाड़ता था तो उसकी आवाज़ से पूरा जंगल गूंज उठता था. सभी जानवर उससे डरते थे. वो हर रोज़ दो-चार जानवरों को मार देता था, जिनमे से कुछ खा लेता और बाकि छोड़ देता था.

एक दिन लोमड़ी ने जानवरों की सभा बुलाई. वह बोली, “आपने देखा की शेर जानवर खा खाकर कितना मोटा हो गया है? जब उसे हम सबको बरी-बरी अपना शिकार बनाना ही है, तो क्यों न हम स्वयं ही हर रोज़ एक-एक करके उसकी गुफा में चले जाएँ.” सभी जानवर एक-दुसरे की तरफ देखने लगे.

फिर कुछ देर सोचकर सभी जानवर बोले, “लोमड़ी बहन! तुम जैसा कहोगी, हम वैसा ही करेंगे.” लेकिन सबसे पहले कौन जायेगा? लोमड़ी ने पूछा. तभी सभी में बैठे नन्हे खरगोश ने कहा, “सबसे पहले मैं जाऊंगा.”

सभा का फैसला सुनकर शेर बहुत खुश हुआ. बोला- “अरे वाह! अब गुफा में बैठे-बैठे ही खाना मिल जायेगा. शिकार के लिए मुझे जंगल में इधर उधर भटकना नहीं पड़ेगा.” अगले दिन नन्हा खरगोश शेर की गुफा में जा पहुँचा. शेर बहुत गुस्से में था.

खरगोश को देखकर उसे और गुस्सा आ गया. वह गरजते हुए बोला, “तुम्हें खाकर मेरा पेट कैसे भरेगा?” खरगोश कांपते हुए बोला, “शेर राजा! आपके लिए चार खरगोश भेजे थे, परन्तु रास्ते में एक दुसरे शेर ने उसे खा लिया.”

यह सुनकर शेर गुस्से में लाल पिला होकर बोला, “मैं इस जंगल का राजा हूँ. यह दूसरा शेर कहाँ से आ गया. चल मुझे बता, कहाँ है वह दूसरा शेर? मैं उसे नहीं छोडूंगा.” खरगोश डरते-डरते बोला, “आपके गुफा से कुछ दूर एक कुँआ हैं, वह उसी में छिपा हुआ है.

” खरगोश शेर को कुएँ के पास ले गया. जब शेर ने कुएँ में झाँका तो पानी में उसे अपनी ही परछाई दिखाई दी, जिसे वह दूसरा शेर समझ बैठा. शेर ने गुस्से में आकर उसे मारने के लिए कुएँ में छलाँग लगा दी और वह डूब कर मर गया.

सिख- इस कहानी से हमें ये सिख मिलती है की हमेशा भाग्य काम नहीं आता कभी कभी बुद्धि से काम लेने पर जान बच सकती है.

3. गुरु का स्थान: Hindi Short Stories with Moral

एक राजा था. उसे पढने लिखने का बहुत शौक था. एक बार उसने मंत्री परिषद् के माध्यम से अपने लिए एक शिक्षक की व्यवस्था की. शिक्षक राजा को पढ़ाने के लिए आने लगा. राजा को शिक्षा ग्रहण करते हुए कई महीने बीत गए, मगर राजा को कोई लाभ नहीं हुआ. गुरु तो रोज़ खूब मेहनत करता था परन्तु राजा को उस शिक्षा का कोई फायेदा नहीं हो रहा था.

राजा बड़ा परेशान, गुरु की प्रतिभा और योग्यता पर सवाल उठाना भी गलत था क्योंकि वो एक बहुत ही प्रसिद्ध और योग्य गुरु थे. आखिर में एक दिन रानी ने राजा को सलाह दी की राजन आप इस सवाल का जवाब गुरु जी से ही पूछ कर देखिये.

राजा ने एक दिन हिम्मत करके गुरूजी के सामने अपनी जिज्ञासा रखी, “है गुरुवर, क्षमा कीजियेगा, मैं कई महीनो से आपसे शिक्षा ग्रहण कर रहा हूँ पर मुझे इसका कोई लाभ नहीं हो रहा है. ऐसा क्यों हैं?”

गुरु जी ने बड़े ही शांत स्वर में जवाब दिया, “राजन इसका कारण बहुत ही सीधा सा है….”

“गुरुवर कृपा करके आप शीघ्र इस प्रशन का उत्तर दीजिये”, राजा ने विनती की.

गुरुजी ने कहा,”राजन बात बहुत छोटी है परन्तु आप अपने ‘बड़े’ होने के अहंकार के कारण इसे समझ नहीं पा रहे हैं और परेशान और दुखी हैं. माना की आप एक बहुत बड़े राजा हैं. आप हर दृष्टि से मुझसे पद और प्रतिष्ठा में बड़े हैं परन्तु यहाँ पर आपका और मेरा रिश्ता एक गुरु और शिष्य का है.

गुरु होने के नाते मेरा स्थान आपसे उच्च होना चाहिए, परन्तु आप स्वयं ऊँचे सिंहाशन पर बैठते हैं और मुझे अपने से निचे के आसन पर बैठाते हैं. बस यही एक कारण है जिससे आपको न तो कोई शिक्षा प्राप्त हो रही है और न ही कोई ज्ञान मिल रहा है.

आपके राजा होने के कारण मैं आप से यह बात नहीं कह पा रहा था. कल से अगर आप मुझे ऊँचे आसन पर बैठाएं और स्वयं निचे बैठें तो कोई कारण नहीं की आप शिक्षा प्राप्त न कर पाएं.”

राजा की समझ में सारी बात आ गई और उसने तुरंत अपनी गलती को स्वीकारा और गुरुवर से उच्च शिक्षा प्राप्त की.

सिख- इस कहानी से हमें ये शिक्षा मिलती है की हम रिश्ते-नाते, पद या धन किसी में भी कितना ही बड़े क्यों न हों हम अगर अपने गुरु को उसका उचित स्थान यानि अपने मन में उनको गुरु का स्थान नहीं देंगे तो हमें ज्ञान कभी नहीं मिलेगा. अगर हम उनका आदर करेंगे, उन्हें महत्व देंगे तो उनका आशीर्वाद हमें सहज ही प्राप्त होगा.

4. दो तोते: Moral Stories in Hindi in Short

एक राजा जंगल में शिकार खेलने गया. शिकार खेलते-खेलते वह रास्ता भटक गया. वह भटकता-भटकता एक गुफा के पास पहुँचा. वहां आम का एक पेड़ था. उस पर एक तोता बैठा था.

राजा को देखते ही वह ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगा, “लूटो, मारो, काटो, पीटो…लूटो, मारो, काटो, पीटो.” राजा वहां नहीं रुका. तोता थोड़ी दूर तक राजा का पीछा करता रहा. वह बार-बार कहता रहा, “लूटो, मारो, काटो, पीटो.” राजा को समझ में कुछ नहीं आया.

वह चलते-चलते एक झोपडी के पास पहुंचा. झोपडी के चारो तरफ पेड़ थे. एक पेड़ पर तोता बैठा था. राजा को देखते ही वह मीठी आवाज़ में कहने लगा, “आओ बैठो, पानी पीओ, खाना खाओ.” तोते की आवाज़ सुनकर झोपडी में से एक साधू बाहर आया. राजा ने साधू को नमस्कार किया.

उसने राजा से चारपाई पर बैठने को कहा. राजा चारपाई पर बैठ गया. उसे सोच में पड़ा देख साधू ने पूछा, “आप क्या सोच रहे हैं?”

राजा बोला, “मैंने आज दो तोते देखे. दोनों अलग-अलग बोली बोलते हैं. थोड़ी दूर पर एक तोता मिला. मुझे देखते ही कहने लगा, लूटो, मारो, काटो, पीटो.” एक तोता यहाँ मिला. मुझे देखते ही बोला, “आओ बैठो, पानी पीओ, खाना खाओ.” मैं यह भेद नहीं समझ पाया.”

राजा की बात सुनकर साधू मुस्कुराए. वह बोले, “यह सब संगती का असर है. दोनों की माँ एक है. पहले दोनों मेरे पास थे. एक को डाकू ले गए. अब वह उनके पास रहता है. उनकी बोली बोलता है.

दूसरा मेरे पास रहता है. वह मेरी बोली बोलता है.” यह सुनकर राजा बोला, “मैं आज समझा, अच्छी संगति का फल अच्छा होता है.”

सिख- इस कहानी से हमें ये सिख मिलती है की हमेशा अच्छे लोगों की संगती में रहना चाहिए. अच्छे लोगों की संगत में रहने का परिणाम भी अच्छा ही होता है.

5. राजू का सपना: Short Moral Stories in Hindi for Class 1

छोटा सा राजू कक्षा दूसरी में पढता था. वह जब मन करता स्कूल जाता, जब मन करता छुटटी कर लेता. वह अपनी किताबें और कॉपियाँ भी संभालकर नहीं रखता था. उसके माता-पिता उसकी इन आदतों से बहुत तंग थे.

उसे गन्दी आदतें छोड़ने के लिए कहते. वह उनकी एक भी बात नहीं मानता था. राजू सोचता, पढने-लिखने से कोई बड़ा आदमी नहीं बनता. वह सोचता- उसके पास ऐसी छड़ी होती जिसको घुमाते ही सब काम हो जाता.

एक दिन राजू गहरी नींद में सो रहा था. उसने देखा की आसमान से तिन परियाँ उतरी है. उन तीनो के हाथ में एक-एक छड़ी है. राजू ने परियों से पूछा, ”आपके हाथ में क्या है?” परियों ने बताया,” हमारे पास ये जादू की छड़ियाँ हैं.

हम एक छड़ी एक बच्चे को देते हैं.” राजू ने पूछा, “इसको घुमाने से क्या सब काम हो जाएँगे?” परियों ने कहा, “हाँ, इसको घुमाते ही जो चाहोगे वह हो जाएगा.” राजू ने कहा, “मुझे इसकी बहुत जरुरत है. यह मुझे दे दो.”

दो परियाँ राजू को छड़ी देने को तैयार हो गई. तीसरी परी नहीं मानी. उसने कहा, “:यह छड़ी हमें किसी मेहनती लड़के को ही देनी चाहिए. राजू जैसे आलसी लड़के को नहीं.” राजू बोला, “नहीं-नहीं, इनमें से एक छड़ी मुझे ही दो.”

परी बोली, “तुम लापरवाह हो. इससे ठीक तरह से काम नहीं ले सकते.” राजू बोला, “मुझे एक महीने का समय दो. अब मैं बिलकुल बदल जाऊंगा.” परी ने कहा, “वायेदा!” राजू ने कहा,” पक्का वायेदा!”

यह कहते ही राजू की नींद खुल गई. उसने देखा पक्षियों की चहचहाट शुरू हो गई है. वह जल्दी से उठा. मंजन और कुल्ला किया. नहा-धोकर स्कुल जाने को तैयार हो गया. उसके माता-पिता हैरान थे. वह तो उठाए से भी नहीं उठता था. राजू दूध पीकर और नाश्ता करके स्कुल चल दिया. स्कुल में वह मन लगा कर पढ़ा.

घर आकर स्कुल का काम किया. किताबें कापियाँ संभालकर रखीं. देखते-देखते राजू बिलकुल बदल गया. वह आलसी नहीं रहा. मेहनती और चुस्त बन गया. एक महिना पूरा हो गया. राजू समझ गया की जादू की छड़ी क्या है.

राजू आज फिर गहरी नींद में सो रहा था. उसने देखा की उसे तीनों परियाँ जगा रही हैं. वे कह रही हैं, “उठो राजू, छड़ी ले लो.” राजू बोला, “आपने मेहनत की छड़ी तो एक महीने पहले ही दे दी थी.”

परी बोली, “राजू तुम तो बहुत समझदार लड़के हो.” राजू बोला, “मैं तो लापरवाह था, आपकी छड़ी ने ही मुझे समझदार बनाया.” दूसरी परी बोली, “अब कभी मेहनत से नहीं डरना.” राजू बोला, “कभी नहीं.” यह कहते ही उसकी नींद खुल गई. सुबह हो गई थी. राजू सब कामों को पूरा कर स्कुल चल दिया.

सिख- इस कहानी से हमें ये सिख मिलती है की आलास नहीं करना चाहिए, आलास किसी भी व्यक्ति का सबसे बड़ा दुश्मन है.

6. मेंढक का रखवाला: New Moral Stories in Hindi

एक राजा अपनी वीरता और सुशासन के लिए प्रसिद्ध था. एक बार वो अपने गुरु के साथ भ्रमण कर रहा था, राज्य की समृद्धि और खुशहाली देखकर उसके भीतर घमंड के भाव आने लगे, और वो मन ही मन सोचने लगे, “सचमुच, मैं एक महान राजा हूँ, मैं कितने अच्छे से अपने प्रजा का देखभाल करता हूँ !”

गुरु सर्वज्ञानी थे, वे तुरंत ही अपने शिष्य के भावों को समझ गए और तत्काल उसे सुधारने का निर्णय लिया. रास्ते में ही एक बड़ा सा पत्थर पड़ा था, गुरूजी ने सैनिकों को उसे तोड़ने का निर्देश दिया. जैसे ही सैनिकों ने पत्थर के दो टुकड़े किये एक अविश्वश्नीय दृश्य दिखा, पत्थर के बीचों बिच कुछ पानी जमा था और उसमे एक छोटा सा मेंढक रह रहा था.

पत्थर टूटते ही वो अपनी कैद से निकल कर भागा. सब अचरज में थे की आखिर वो इस तरह कैसे कैद हो गया और इस स्थिति में भी वो अब तक जीवित कैसे था?

अब गुरू जी राजा की तरफ पलटे और पूछा, “अगर आप ऐसा सोचते हैं की आप इस राज्य में हर किसी का ध्यान रख रहे हैं, सबको पाल-पोष रहे हैं, तो बताइये पत्थरों के बिच फंसे उस मेंढक का ध्यान कौन रख रहा था.. बताइये कौन है इस मेंढक का रखवाला?”

राजा को अपनी गलती का एहसास हो चूका था, उसे अपने अभिमान पर पछतावा होने लगा, गुरु की कृपा से वे जान चुके थे की वो ईश्वर ही है जिसने हर एक जीव को बनाया है और वही है जो सबका ध्यान रख रहा है.

सिख- इस कहानी से हमें यही सिख मिला की कई बार अच्छा काम करने पर मिलने वाला यश और प्रसिद्धि से लोगों के मन में अहंकार घर कर जाता है. हमे ध्यान रखना चाहिए की हम चाहे इस जीवन में किसी भी मुकाम पर पहुँच जाएं कभी घमंड ना करें और अपने अर्थपूर्ण जीवन के लिए ईश्वर, अल्लाह, वाहे-गुरु के कृतज्ञ रहे.

7. लालची बबलू: Hindi Short Stories for Class 1

बबलू एक अच्छा लड़का था. वह पढाई में भी निपुण था. वह अपने माता-पिता का बहुत आदर करता था. चॉकलेट और मिठाई देखकर वह अपने आपको रोक नहीं पता था. उसमें यही एक बुरी आदत थी. माँ उसे कई बार समझाती, “बेटा! इतना मीठा मत खाया करो, तुम्हारे दांत ख़राब हो जायेंगे.”

एक दिन बबलू की माता जी बाज़ार गई थी. तब वह रसोई में गया औउ जार में रखी टोफियाँ देखकर उसके मन में लालच आ गया. उसने जार उठाया और टोफियाँ भर लीं और हाथ बाहर निकालने लगा. जार का मुँह छोटा होने के कारण उसकी बंद मुटठी बाहर नहीं निकल पा रही थी.

लालच के कारण वह अपनी मुटठी खोल नहीं रहा था. काफी समय बित गया. थका हुआ बबलू अब भी हाथ निकलने की कोशिश कर रहा था, तभी उसकी माता जी आ गई. उसे देखकर माँ बोली,”बेटा! तुमने अपने हाथ में बहुत सी टोफियाँ ले रखी है, केवल एक टॉफी लो और बाकि उसी जार में छोड़ दो तभी तुम अपना हाथ बाहर निकाल पाओगे.

” बबलू ने वैसा ही किया, उसका हाथ बाहर निकल आया. माँ ने उसे समझाया, “बेटा लालच करना अच्छी आदत नहीं है. लालच से इंसान का कभी अच्छा नहीं होता हमेशा बुरा ही होता है.”

सिख- लालच करने से इंसान की जिंदगी लुट जाती है, और बहुत से लोगों की लुटी भी है, लालच और तृष्णा दोनों ही ऐसी चीजें हैं जिनका कोई अंत नहीं लेकिन इनको पूरा करते करते इंसान का जरुर अंत हो जाता है. इसलिए हमेशा लालच से बचो और अपनी बुद्धि से काम लो.

8. चार गाय और एक शेर: Moral Stories in Hindi for Class 7

चार गाय जंगल के पास वाले घास के मैदान में एक साथ रहते थे. वो सब एक दुसरे के बहुत अच्छे दोस्त थे और हमेसा सारी चीजें एक साथ किया करते थे. साथ में घास चरने जाते थे और एक साथ ही रहते थे. हमेसा एक साथ होने की वजह से कोई शेर उन्हें खाने के लिए मार नहीं पाता था.

लेकिन एक दिन उन दोस्तों में लड़ाई हो गई और चारों गाय अलग अलग दिशा में घास चरने चल दिए. एक बाघ और एक शेर ने इनके बिच की लड़ाई देख ली थी और उन्होंने ये फैसला किया की यही एक अच्छा मौका है चारों गायों को मारकर खाने का.

शेर और बाघ जंगल के झाड़ियों में छुपकर गायों का इंतज़ार करने लगे और एक एक करके उन्होंने चारों गाय को मार दिया.

सिख- इस कहानी से हमें ये सिख मिलती है की एकता में ही शक्ति होती है.

9. एक ऊंट और उसका बच्चा: Short Moral Stories in Hindi for Class 8

एक दिन एक ऊंट और उसका बच्चा एक दुसरे से बातें कर रहे थे. बच्चे ने माँ से सवाल पूछा, ”माँ, हमारे पीठ पर ये कूबड़ क्यों है?” माँ ने जवाब दिया, “हमारे पीठ पर कूबड़ पानी को इकठ्ठा करके रखने के लिए हैं ताकि हम रेगिस्तान में बिना पानी के भी जीवित रह सके.”

बच्चे ने फिर से एक सवाल किया, “और हमारे पैर का पंजा गोल-गोल क्यों है माँ?” माँ ने जावाब दिया, “क्योंकि हमारे पंजे हमें रेतीले जगह पर आसानी से चलने में मदद करते हैं. हमारे पैर के गोल पंजों के वजह से ही हम रेत पर बिना दिक्कत के एक जगह से दूसरी जगह पर जा सकते हैं.”

बच्चे ने कहा, “अच्छा ठीक है लेकिन हमारे आँखों की पलकें इतने लम्बे क्यों हैं?” माँ ने जवाब दिया, “हमारी लम्बी पलकें हमें रेत के धुल और बालू से बचा कर रखते हैं ताकि ये हमारे आँखों में जा ना सके.”

कुछ देर तक सोचने के बाद बच्चे ने कहा, “अच्छा तो हमारे पीठ पर कूबड़ है पानी को रखने के लिए ताकि रेगिस्तान पर सफ़र करने में हमें कोई दिक्कत न हो, गोल पंजे हैं ताकि हम रेत पर आसानी से चल सकें और लम्बी पलकें तूफ़ान के समय रेगिस्तान के धुल और रेत से हमारी आँखों को बचा कर रखते हैं. तो फिर हम इस चिड़ियाघर में क्या कर रहे हैं?”

माँ के पास अपने बच्चे के इस सवाल का कोई जवाब ना था.

सिख- आपकी ताकत, कुशलता और ज्ञान ये सब बेकार हैं अगर आप सही जगह पर नहीं हैं.

10. हाथी और उसके दोस्त: Short Interesting Story in Hindi

एक अकेला हाथी जंगल में एक दोस्त की तलाश में इधर उधर भटक रहा था. चलते चलते उसे एक बन्दर मिला और हाथी ने उससे पूछा, “प्यारे बन्दर, क्या तुम मेरे दोस्त बनोगे?”

तो बन्दर ने जवाब दिया की, “तुम बहुत बड़े और मोटे हो और मेरी तरह तुम एक पेड़ से दुसरे पेड़ पर लटक नहीं सकते. इसलिए मैं तुम्हारा दोस्त नहीं बन सकता.”

फिर हाथी को रास्ते में एक खरगोश मिला और उससे भी यही सवाल किया की क्या तुम मेरे दोस्त बन सकते हो? तो खरगोश ने जवाब दिया, “तुम बहुत बड़े हो और मेरे साथ मेरे घर में भी आ नहीं सकते इसलिए तुम मेरे दोस्त नहीं बन सकते.”

हाथी को आगे जाकर एक मेंढक मिला और हाथी ने उससे भी पूछा की क्या तुम मेरे दोस्त बनोगे? मेंढक ने जवाब दिया, “तुम बहुत बड़े और भारी हो तुम मेरी तरह छलांग नहीं मार सकते इसलिए तुम मेरे दोस्त नहीं बन सकते.”

इस तरह हाथी से किसी ने भी दोस्ती नहीं किया क्यूंकि वो size में बहुत ही बड़ा था. अगले दिन जंगल में सारे जानवर डर के मारे इधर उधर भाग रहे थे.

हाथी ने एक भालू को रोक कर पूछा की क्या हो रहा है सब डर क्यों रहे हैं तो भालू ने कहा एक शेर ने जंगल पर हमला कर दिया है और वो एक एक करके सभी जानवरों को मार रहा है.

हाथी उन कमजोर जानवरों को शेर से बचाना चाहता था इसलिए वो शेर के पास गया और उससे कहा की, “मेरे दोस्तों को अकेला छोड़ दीजिये और उन्हें मत मारिये.” शेर ने हाथी की एक बात नहीं सुनी और हाथी से कहा की वो अपने काम से मतलब रखे और उसके रास्ते में ना आये.

हाथी की बात शेर ने नहीं सुना इसलिए इस समस्या को सुलझाने के लिए हाथी को कोई और रास्ता नहीं दिखा इसलिए हाथी ने जोर से शेर को लात मारी और उसे डरा कर भागा दिया.

ये देख कर सारे जानवर बहुत खुश हुए और सबने हाथी से दोस्ती कर ली. सारे जानवरों ने हाथी से कहा, “हमारा दोस्त बनने के लिए तुम्हारा size से कोई फर्क नहीं पड़ता, तुम जैसे हो वैसे ही अच्छे हो और आज से तुम हमारे दोस्त हो.”

सिख- इस कहानी से हमें ये सिख मिलती है की दोस्त रंग, रूप या size देखकर नहीं बनाये जाते. दोस्त तो हर रूप में मिल जाते हैं.

आशा है की आपको “10 short stories in Hindi” लेख पसंद आएगा और साथी ही मुझे ये भी उम्मीद है की आपको इन कहानियों से बहुत सी सिख मिली होगी जो आपके और आपके बच्चों को जीवन में सही राह पर चलने की प्रेरणा देगी. अगर आपको ये लेख अच्छा लगा तो आप इसे सभी के साथ ज्यादा से ज्यादा share करिये और कोई राय हो तो निचे कमेंट करिए.

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