प्रकृति एक माँ पर निबंध

प्रकृति एक माँ पर निबंध: हम ब्रहमांड के सबसे खुबसूरत ग्रह पृथ्वी पर रहते हैं जहाँ सब कुछ हरा भरा और मन को मंत्रमुग्ध कर देने वाला दृश्य हमें इश्वर से वरदान के रूप में मिला है. हम बहुत खुशनसीब हैं की हमने इस धरती पर जन्म लिया है जो हमें अपने आकर्षक वातावरण से घेरे हुई है और हमारा पालन पोषण भी करती है.

हम प्रकृति को माँ समान मानते हैं क्यूंकि ये प्रकृति ही हमारा भरन पोषण करती है, हमें रोगमुक्त करती है और साथ ही साथ नाराज़ हो जाने पर सब कुछ नष्ट भी कर देती है. प्रकृति हमसे तभी नाराज़ होती है जब हम उसके साथ छेड़खानी करते हैं.

प्रकृति हमें अपना संतान मानती है पर क्या हम उसे अपना मानते हैं? हम अपने फायेदे के लिए बस उसका इस्तेमाल करते हैं और उसे हानि पहुंचाते हैं. इसलिए आज के दौर में हमें अपने प्रकृति को समझने की आवशयकता है. उसकी खूबसूरती को बिगाड़ने का नहीं बल्कि उसका संरक्षण करना हमारा कर्त्तव्य है.

प्रकृति का महत्व हमारे जीवन में क्या है ये बताने के लिए मैंने यहाँ प्रकृति की सुंदरता पर निबंध प्रस्तुत किया है जिसका लाभ स्कूल के छात्र अपने विद्यालय के कार्य के लिए उठा सकते हैं. प्रकृति के बारे में सबको जानना चाहिए ये हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और ख़ास कर के हमें अपने बच्चों को इसके बारे में बताना चाहिए. तो चलिए इस लेख के जरिये हम ये कार्य भी कर लेते हैं.

प्रकृति एक माँ पर निबंध (Essay on Nature in Hindi)

prakriti ek maa par nibandh
प्रकृति एक माँ पर निबंध

पृथ्वी पर सुखी जीवन व्यतीत करने के लिए भगवान ने हमें सबसे अनमोल और कीमती चीज प्रकृति के रूप में प्रदान किया है. प्रकृति क्या है? हम अपने आसा पास जितने भी पेड़-पौधे, बाघ- बगीचे, जीव-जंतु, नदी-समुद्र, पशु-पक्षी, मनुष्य इत्यादि देखते हैं वही हमारी प्रकृति है. हम सभी के लिए प्रकृति इश्वर का दिया हुआ वरदान है.

प्रकृति हमारे जीवन को सरल बनाने के लिए हर साधन प्रदान करती है जो हमारे लिए अतिआवश्यक है. हमारी प्रकृति हमें कई प्रकार के सुन्दर फूल, प्रलोभक पक्षी, जानवर, हरे भरे वनस्पति, नीला आकाश, भूमि, बहती हुयी नदियाँ, समुद्र, घना जंगल, शुद्ध हवा, ऊँची ऊँची पहाड़े, सुन्दर वादियाँ आदि प्रदान करती है.

भगवान द्वारा प्रदान किये गए इस नायाब तोफे को हम हर पल देख सकते हैं और साथ ही इसका लुफ्त भी उठा सकते हैं. इस धरती पर जीवन प्रकृति के कारण ही संभव है. ब्रह्माण्ड में पृथ्वी के अलावा और भी कई ग्रह हैं लेकिन इस प्रकृति के बिना वहां जीवन संभव नहीं है.

हमारी कुदरत में ढेर सारी प्राकृतिक सुंदरता सुशोभित है. हम हर जगह इसमें प्राकृतिक बदलाओं को देख, सुन और महसूस करते हैं. भारत में प्राकृतिक सुंदरता का कोई मुकाबला नहीं है. हमारे धरती पर प्रकृति के बहुत से प्रकार हैं जो प्रकृति का सौंदर्य में चार चाँद लगाता है.

कहीं पर विशाल पेड़ों के हरे भरे वन हैं, तो कहीं पर रेतीले रेगिस्तान हैं. कहीं पर बहती हुई चंचल नदियाँ हैं तो कहीं पर समुद्र की लेहेरें हैं जिसका दृश्य देखने मात्र ही मनुष्य के दिन भर की सारी थकानें दूर हो जाती है. धरती पर हिमालय पर्वत जैसी विशाल और लम्बी लम्बी पहाड़ें भी है जो प्रकृति का विशाल स्वरुप दिखाती है.

धरती में एक ही समय में कई जगह पर भीषण गर्मी होती है तो कहीं पर धुआंधार बारिश तो कहीं पर बर्फ की सफ़ेद चादर बिछी होती है. ये सब प्रकृति का ही रूप है जो जगह के हिसाब से हमे अलग अलग नज़र आता है. इसलिए लोग छुट्टियों में एक जगह से दुसरे जगह प्राकृतिक सुंदरता को देखने के लिए ही जाते हैं और मज़े करते हैं.

प्रकृति मनुष्य का मित्र है क्यूंकि यह हमेशा हमें कुछ न कुछ देती है लेकिन बदले में हमसे कुछ भी नहीं लेती. यह हमें पिने के लिए शुद्ध पानी, साँस लेने के लिए शुद्ध हवा, खाने के लिए भोजन और अन्य स्त्रोत भी उपलब्ध कराती है. प्रकृति हमारे स्वास्थय को भी अच्छा रखती है. यह हमें बहुत सी औषधियां प्रदान करती है जिससे की गंभीर बिमारियों का इलाज करना संभव हो पाता है.

प्रकृति के साथ समय बिताने पर मन को जो सुकून और शांति मिलती है वो और कहीं भी नहीं मिलती. लेकिन आज कल किसी के पास भी इतना वक़्त नहीं है की वो अपने जीवन का थोडा सा समय निकाल कर प्रकृति की सुंदरता का आनंद उठाये. दुनिया के इस भीड़ और अपने भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी में हम प्रकृति का सुख लेना और अपने स्वस्थ का ख्याल रखना जैसे भूल से गए हैं.

इस विज्ञान के युग में हम अपने स्वास्थय के लिए तकनिकी से जुड़े साधनों का अधिक उपयोग कर रहे हैं. जबकि सच तो ये है की प्रकृति ही हमारा बेहतर लालन-पालन कर सकती है और हमें जीवन भर स्वस्थ रख सकती है. प्रकृति के पास ये क्षमता है की वो हमें तनाव मुक्त रख सके और कई प्रकार की बिमारियों का प्राकृतिक इलाज कर सके.

मनुष्य के जीवन में तकनिकी उन्नति बढ़ने के वजह से हमारी प्रकृति धीरे धीरे नष्ट होती जा रही है इसलिए हमे इसको संरक्षित रखने और प्राकृतिक संतुलन को बनाये रखने के लिए उच्च स्तर की जागरूकता की जरुरत है. पर्यावरण और प्रकृति के विनाश को रोकने के लिए हमें इसे स्वच्छ रखना होगा.

आज सभी मनुष्य अपने लाभ के लिए प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और जीव-जंतुओं के अस्तित्व को मिटाने की कोशिश की जा रही है. वनों का तेज़ी से विनाश हो रहा है. प्राकृतिक असंतुलन के कारण आज मौसम जिस तरह से बदल रहा है उसका नतीजा बहुत भयंकर हो सकता है.

वर्तमान में हम प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध इस्तेमाल कर रहे है जिससे संतुलन बिगड़ रहा है. हमारी मनमानियों के वजह से सदियों से प्राकृतिक आपदा मनुष्य के अस्तित्व के लिए चुनौती बन गयी है. एक प्राकृतिक आपदा, पृथ्वी की प्राकृतिक प्रक्रियाओं से उत्पन्न एक बड़ी घटना है. प्राकृतिक आपदा अपने साथ बहुत सारा विनाश लेकर आती है. यह जीवन और संपत्ति के एक बड़े नुक्सान का कारण बनती है.

जंगल में आग, बाढ़, हिमस्खलन, भूस्खलन, भूकंप, ज्वालामुखी, सुनामी, चक्रवाती तूफ़ान, सुखा इत्यादि ये सभी प्राकृतिक आपदा के प्रकार हैं जो बार बार मनुष्य को चेतवानी दी हैं की प्रकृति के साथ छेड़ छाड़ ना करें. मनुष्य ने पर्यावरण प्रदुषण, ग्लोबल वार्मिंग, ग्रीन हाउस प्रभाव जैसी कई प्रकृति के विनाश करने वाले कारणों को अपने स्वार्थ के लिए उत्पन्न किया है.

इश्वर ने सब कुछ बहुत खूबसूरती से बनाया है जिसे देख कर हमारी आँखें कभी नहीं थकती और ना ही कभी हमारा मन उनसे भरता है. लेकिन हम भूल जाते हैं की केवल प्रकृति का हमारे तरफ ही नहीं बल्कि हमारी भी प्रकृति की तरफ उतनी ही जिम्मेदारी बनती हैं की हम उसकी रक्षा करें.

हमें जितना हो सके उतना कार्य अपने प्रकृति के संरक्षण के लिए करना चाहिए जैसे पर्यावरण को स्वच्छ करना, प्रदुषण रोकना, वनीकरण को बढ़ावा देना, वृक्षारोपण करके मृदा अपरदन को रोकना, प्रकृति में असंतुलन पैदा ना करना, पेड़ों और जंगलों की कटौती ना करना, समुद्र और नदियों को प्रदूषित ना करना, ऊर्जा और जल का संरक्षण करना इत्यादि. हमें अपनी प्रकृति के बारे में पूरी जानकारी रखनी चाहिए और इसको वास्तविक बनाये रखने का प्रयास करना चाहिए जिससे धरती पर जीवन हमेसा संभव हो सके.

कभी कभी हम छुट्टियों में घर से बाहर जाना पसंद नहीं करते और घर पर ही सारा दिन टीवी देखते रहते हैं और कंप्यूटर पर खेलते रहते हैं. हम बेवजह घर की सभी लाइटों को जलाकर रखते हैं, जरुरत ना होने पर भी हम बिजली का उपयोग ज्यादा करते हैं. इसी वजह से प्रकृति का तापमान प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है और ग्लोबल वार्मिंग का खतरा भी.

हमारी दूसरी कार्यकलापों जैसे पेड़ों और जंगलों के बेहिसाब काटने और नष्ट करने की वजह से वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड गैस की मात्रा में वृद्धि होती है जो ग्रीन हाउस प्रभाव और ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनती है.

ग्लोबल वार्मिंग के कारण हमारे वायुमंडल में एक छेद हो गया है जिसे ‘ब्लैक होल’ कहा जाता है. इस छेद के कारण सूरज की गरम किरणे सीधे धरती पर पड़ती है और यही वजह है की पिछले कई सालों से धरती का तापमान प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है. अगर हम अपनी आदतों को नहीं सुधारेंगे तो जल्द ही पृथ्वी पर पल रहे सभी प्राणी, पेड़-पौधे और जिव-जंतु का अंत होना निश्चित है.

अगर हमें धरती पर ख़ुशी और स्वस्थ जीवन व्यतीत करना है तो हमें स्वार्थी और गलत कार्यों को रोकना होगा जिससे प्रकृति पर बुरा असर पड़ रहा है. इस धरती पर केवल हम मानव जाती ही उस काबिल हैं की हम अपने प्रकृति और ग्रह को नष्ट होने से बचा सकते हैं.

प्रकृति हम मनुष्य के लिए खजाने की तरह है जो हमें सारी सुख सुविधाएं प्रदान करता है. लेकिन अगर लालच में आकर हम इसका उपयोग ज्यादा करने लगेंगे तो यही खजाना हमारे लिए विनाश का कारण भी बन सकता है. इसलिए हमें इसके महत्व और कीमत को समझना चाहिए और इसके वास्तविक स्वरुप को बनाये रखने की कोशिश करनी चाहिए.

मुझे उम्मीद है की आपको ये लेख “प्रकृति एक माँ पर निबंध” पसंद आएगा. अगर आपको इस लेख से जुडी कोई भी सुझाव देना है तो आप हमें कमेंट के जरिये अपनी बातें शेयर कर सकते हैं.

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