रमजान पर निबंध और इसका महीना कब से शुरू है?

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रमजान पर निबंध (Essay on Ramzan in Hindi): भारत में अनेक धर्म के लोग एक साथ मिलजुल कर रहते है, जहाँ सभी धर्म के लोगों को अपना अपना त्यौहार धूम धाम से मनाने की पूरी आजादी दी जाती है. ऐसा दृश्य और ऐसी आजादी विश्व के किसी और देश में देखने को नहीं मिलती है. वो सभी व्यक्ति खुशनसीब है जिसने भारत जैसे देश में जन्म लिया है.

यहाँ जितना मान सम्मान हिन्दू धर्म के लोगों के दिया जाता है उतना ही मान सम्मान इस्लाम धर्म के लोगों को भी दिया जाता है. जिस तरह मुस्लिम लोग हिन्दू भाइयों बहनों के साथ होली और दिवाली प्रेम से मिलकर मनाते हैं उसी तरह हिन्दू लोग भी मुस्लिम भाई बहनों के साथ ईद के दिन उनके खुशियों में शरीक होते हैं.

मुस्लिम धर्म के लोगों के लिए ईद सबसे बड़ा पर्व होता है लेकिन उससे पहले उन्हें एक माह तक उपवास रखना होता है, ये उपवास हिन्दू धर्म के लोगों के उपवास रखने से पूरा अलग होता है. मुसलमानों के बारह महीनों में एक महीने को रमजान कहा जाता है जिसमे रमजान उपवास किया जाता है.

रमजान के बारे में आप सभी ने अपने मुस्लिम दोस्तों से जरुर सुना होगा लेकिन रमजान का पूरा इतिहास क्या है, इससे मानाने के पीछे की क्या कहानी है इसके बारे में आज मै आपको रमजान ईद निबंध के जरिये बताने वाली हूँ.

हर पर्व का अपना एक महत्व होता है और मेरा ऐसा मानना है की हम सभी को हर पर्व के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए ताकि जब आपसे छोटे उम्र के बच्चे किसी भी पर्व को मनाने के पीछे की कहानी या कारण पूछे तो आप उन्हें सही सही ज्ञान दे सकें. इसी उद्देश्य के साथ चलिए अब हम रमजान पर लेख शुरू करते हैं.

रमजान पर निबंध – Essay on Ramzan in Hindi

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रमजान क्या है? इस्लाम धर्मे के लिए रमजान या रमदान को पवित्र महिना माना जाता है. इस पवित्र महीने में इस्लाम में आस्था रखने वाले लोग नियमित रूप से रोज़े यानि उपवास रखते हैं. इस दौरान दिनभर कुछ भी खाना या पीना मना होता है.

रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवा महिना होता है और इस धर्म में चाँद को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है. इबादत करना, रोज़ा रखना, भोजन करवाना और आपसी मेल मिलाप बनाये रखना इस त्यौहार की प्रमुख विशेषता है.

माना जाता है की रमजान के महीने में जन्नत के दरवाजे खुल जाते हैं. अल्लाह रोजेदार और इबादत करने वाले की दुआ कुबूल करता है और इस पवित्र महीने में गुनाहों से मुक्ति मिलती है. रमजान में मुस्लिम लोगों को बहुत कठिन नियमों का पालन करना पड़ता है. रोज़ा रहने के दौरान सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक कुछ भी नहीं खाते पिते.

रमजान में बुरी आदतों से दूर रहने के लिए भी कहा गया है. रमजान का महिना इसलिए पवित्र माना जाता है क्योंकि इस दौरान मुस्लिम लोगों को बुरे विचार लाने, किसी की बदनामी करने, लालच करने, झूठ बोलने और झूठी कसम खाने से परहेज करने को कहा गया है.

अरबी में रोज़ा को ‘सौम’ कहा जाता है जिसका अर्थ है परहेज करना ना केवल खाने पिने से बल्कि बुरे काम, बुरी सोच और बुरे शब्दों से भी. इसलिए रोज़े सिर्फ शारीरिक परहेज नहीं है बल्कि एक इंसान के शरीर और रूह का रोज़े के भाव की तरफ एक जिम्मेदारी है.

रोज़ा सबके लिए एक फ़र्ज़ है जिसे रखने से आत्मा की शुद्धि, अल्लाह की तरफ पूरा ध्यान और कुर्बानी का अभ्यास होता है जिससे आदमी किसी भीतरह के लालच से खुद को दूर रखने में कामयाब हो पाता है.

हालाँकि मुस्लिम धर्म के वो लोग जिनकी रमजान के दौरान तबियत ख़राब है, उम्र अधिक है, महिला गर्भावस्था में है या फिर कोई अन्य परेशानी है जिसकी वजह से रोज़े रखने में असमर्थ हैं, तो उन्हें रोज़े रखने के लिए बाध्य नहीं किया गया है.

लेकिन अगर कोई स्वस्थ व्यक्ति रमजान के महीने में बीमारी, सफ़र या किसी अन्य कारण से रोज़े नहीं रख पाता तो रमजान के बाद भी रोजे रखकर गिनती पूरी की जा सकती है. जो लोग रोज़े नहीं रख सकते वो इसके बदले गरीब और भूखे लोगों को भोजन करवाते हैं और दान दक्षिणा देते हैं.

रमजान का इतिहास: रमजान क्यों मनाते हैं?

रमजान का सिलसिला सदियों से चला आ रहा है. इस्लामिक धर्म के मान्यताओं के अनुसार ऐसा कहा जाता है की 610 ईस्वी में पैगंबर मुहम्मद साहब के जरिये पवित्र किताब “कुरान शरीफ” जमीन पर उतरी थी. कहते हैं की तभी से दुनियाभर के मुसलमान पहली बार कुरान उतरने की याद में पुरे महीने रोज़े रखते हैं. लिहाजा रमजान को कुरान के जश्न का भी मौका माना जाता है. इस्लाम धर्म में रोजा को अल्लाह का शुक्रिया अदा करने का त्यौहार माना गया है.

रमजान का महिना हर मुसलमान के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, जिसमे 30 दिनों तक रोज़े रखे जाते हैं. इस्लाम के मुताबिक पुरे रमजान को तिन हिस्सों में बाँटा गया है जो पहला, दूसरा और तीसरा अशर कहलाता है. अशर अरबी का 10 नंबर होता है. इस तरह हर अशर 10-10 दिन का होता है.

पहला अशर रहमत का होता है यानि रमजान महीने के पहले 10 दिन रहमत के होते हैं जिसमे रोज़ा और नमाज़ करने वालों पर अल्लाह की रहमत होती है. इस दौरान रोज़ेदार को ज्यादा से ज्यादा दान करके गरीबों की मदद करनी चाहिए.

रमजान के 11वें रोज़े से 20वें रोज़े तक दूसरा अशर चलता है जिसमे लोग अल्लाह की इबादत कर उनसे अपनी गुनाहों की माफ़ी मांगते है. इस्लामिक मान्यता के मुताबिक अगर कोई इंसान रमजान के दौरान अपने गुनाहों की माफ़ी मांगता है तो अल्लाह उसकी माफ़ी कुबुल कर लेते हैं.

रमज़ान का महिना कभी 29 दिन का तो कभी 30 दिन का होता है. रमजान का तीसरा और आखरी अशर 21वें रोज़े से लेकर 29वें या 30 वें रोज़े तक चलता है. ये अशर सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इस अशर का उद्देश्य जहन्नम की आग से खुद को सुरक्षित रखना है. इस दौरान हर मुसलमान को जहन्नम से बचने के लिए अल्लाह से दुआ करनी चाहिए.

रमजान का महत्व

रमजान से इंसानों को बहुत कुछ सिखने को भी मिलता है. लोग अपनी रोज़मर्रा के कामों को करते हुए अल्लाह की इबादत करना भूल जाते हैं या समय नहीं निकाल पाते हैं. रमजान का महिना अल्लाह के बंदो को ये याद दिलाता है की ये ज़िन्दगी उस खुदा की नेमत है, कुछ समय उसकी इबादत के लिए भी निकाल लें ताकि खुदा का रहम हम सभी इंसानों पर बना रहे.

इस्लाम के तहत रमजान के वक़्त सभी मसलमानों को अपनी ज़िन्दगी के मकसद को फिर से समझने की कोशिश करनी चाहिए. अगर किसी ने हमारे साथ गलत किया है तो भी उन्हें माफ़ कर देना चाहिए. बुरी आदतों से बचनी चाहिए और गरीब और दुखी लोगों को पैसा, कपडा, भोजन इत्यादि दान दक्षिणा करना चाहिए जिसे जकात कहा जाता है. कहते हैं की रमजान के इस महीने में जो नेकी करेगा और रोज़ा के दौरान अपने दिल को साफ़ पाक रखता है अल्लाह उसे खुशियाँ जरुर देता है.

रमजान कब है 2020 में – Ramadan 2020 Date

रमजान के बारे में इतना सब कुछ जानने के बाद आप के मन में भी ये जरुर आ रहा होगा की रमजान कब है या रमजान कब से शुरू है? बरकतों से भरा इस्लाम धर्म का पवित्र महिना रमजान 2020 में अप्रैल महीने के 23 तारीख से शुरू होगा और 23 मई को खत्म होगा.

रमजान में करीब 1 महीने तक हर दिन सूरज उगने से पहले उठकर भोजन किया जाता है जिसे सहरी कहते हैं, फिर दिन भर रोज़ा रखा जाता है और शाम के समय रोजेदार रोजा खोलने या तोड़ने के लिए जो खाना खाता है उसे इफ्तारी कहते हैं. इफ्तार के वक़्त सच्चे मन से जो दुआ मांगी जाती है वो कुबूल होती है.

रोजेदार खजूर खाकर रोजा तोड़ता है. एक इस्लामिक साहित्य के मुताबीक अल्लाह के एक दूत को अपना रोज़ा खजूर से तोड़ने की बात लिखी गई है, इसी के आधार पर सभी रोजेदार खजूर खाकर रोजा तोड़ते हैं. इसके अलावा खजूर पेट की दिक्कत और कमजोरी जैसे अन्य बिमारियों को ठीक करता है. रमजान में भूखे प्यासे रह कर इंसान को किसी भी प्रकार के लालच से दूर रहने और सही रास्ते पर चलने की हिम्मत मिलती है.

रमजान के ख़त्म होने पर कौन सा त्यौहार आता है?

इस्लाम धर्म में रमजान के पुरे महीने रोज़े रखने के बाद रमजान का चाँद डूबने और ईद का नया चंद देखने के अवसर पर ईद-उल-फितर का त्यौहार मनाया जाता है. मुस्लिम धर्म के लोगों के लिए यह अवसर भोज और आनंद का होता है. फितर शब्द अरबी के ‘फतर’ शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ होता है दान करना.

इस्लाम के मानने वालो का फ़र्ज़ है की वे अपनी हैसियत के हिसाब से ईद के दिन जरुरतमंदों को दान दें, इस दान को इस्लाम में जकात और फितरा भी कहा जाता है.

वैसे तो रोज़े के दौरान भी दान दक्षिणा दिए जाने की परंपरा है जिससे अल्लाह का आशीर्वाद मिलता है. यह दान जकात के नाम से जाना जाता है. जकात रोज़े के दौरान भी दी जाती है लेकिन ईद वाले दिन नमाज़ से पहले गरीबों को फितरा बाँटा जाता है जिसे फितर देना कहा जाता है जिस कारण ईद को ईद-उल-फितर कहा जाता है.

ईद खुशी का दिन होता है जिसमे मुस्लिम लोग सुबह सबसे पहले नहा कर, नए नए कपडे पहन सुगंधित इत्र लगाकर ईदगाह जाते हैं और ईद की नमाज़ अदा करते हैं. आम तौर पर इस दिन पुरुष सफ़ेद कपडे पहनते हैं क्योंकि सफ़ेद रंग पवित्रता और सादगी का प्रतिक है.

ईद की नमाज़ के बाद लोग एक दुसरे को गले लगकर ईद की मुबारकबाद देते हैं और सब मिलकर सेवैयाँ खाते हैं. ईद का त्यौहार हम सबको मिल जुलकर रहना सिखाती है. आपसी प्रेम और भाईचारे को अपनाने वालों पर अल्लाह की रहमत बरसती है.

रमजान पर लेख

रमजान अल्लाह की इबादत का महिना है जो अपने कठोर नियमों के लिए पुरे विश्व में जाना जाता है. भारत के हर त्यौहार का उद्देश्य खुशी और एकता होता है. रमजान भी एक ऐसा त्यौहार है जो एकता आर प्रेम ही सिखाता है. रमजान का त्यौहार हमें बुरी आदतों से दूर रहने और जरुरतमंदों की हमेशा मदद करने की सिख देता है.

आशा करती हूँ की आपको ये लेख रमजान ईद पर निबंध पसंद आएगा जिसमे मैंने आपके लिए रमजान से जुड़े सभी जानकारी देने की हर मुमकिन कोशिश की है. रमजान से जुडी और भी कोई जानकारी अगर आप हमारे साथ बाँटना चाहते हैं तो हमें कमेंट में जरुर बतायें. साथ ही इस लेख को अपने दोस्तों के साथ social networking sites पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें.

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