बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य क्या है?

बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य क्या है? आज का हमारा ये विषय बहुत ही अलग है जहाँ मै आपको इस रहस्यमयी दुनिया की एक ऐसी कहानी बताने वाली हूँ जिसे सुन कर यक़ीनन आपके होश उड़ जायेंगे. ये लेख उन लोगों के लिए है जो विज्ञान और रहस्य से जुड़े विषयों में रूचि रखते हैं. ऐसा मै इसलिए कह रही हूँ क्यूंकि आज मै बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य क्या है? से जुडी रहस्यमयी कहानी के बारे बताने वाली हूँ. आप में से कई लोगों ने बरमूडा ट्रायंगल के बारे में जरुर सुना होगा जहाँ बड़े से बड़े जहाज और एयरक्राफ्ट आश्चर्यजनक तरीके से गायब हो चुके हैं. क्यूँ? कैसे? और कब? इसके बारे में जानने के लिए ये लेख जरुर पढ़ें.

बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य क्या है

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बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य जानने से पहले ये जान लेते हैं की बरमूडा ट्रायंगल कहाँ पर है? बरमूडा ट्रायंगल अमेरिका के फ्लोरिडा (Florida), प्युर्टोरिको (Puerto Rico) और बरमूडा (Bermuda) तीनो को जोड़ने वाला एक काल्पनिक ट्रायंगल यानि त्रिकोण है जिसे “devils triangle” यानि “शैतानी त्रिभुज” भी कहा जाता है. यह बरमूडा त्रिकोण अटलांटिक महासागर का एक क्षेत्र है जो अमेरिका के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित है. इस त्रिकोण का क्षेत्रफल लगभग 13 लाख वर्ग किलोमीटर है. इतना क्षेत्रफल भारत के राज्य राजस्थान, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के संयुक्त क्षेत्रफल को मिलाया जाये तो भी ये आकार में बड़ा ही साबित होगा. हालाँकि त्रिकोण क्षेत्रफल कहाँ से शुरू हुआ है और कहाँ पर खत्म इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है लेकिन इस त्रिकोण के बाहर भी इसका प्रभाव रहता है.

यह वह जगह है जहाँ पर magnetic disturbance की वजह से कंपास ठीक से काम नहीं करता जिसके कारण कई एयरक्राफ्ट्स और समुद्री जहाज खो गए हैं और ये किसी को भी पता नहीं लग सका की वो कहाँ चले गए क्यूंकि आज तक न तो जहाज और न ही उसके यात्री कभी लौट कर वापस आये. दुनिया विज्ञान के क्षेत्र में कहाँ से कहाँ पहुँच गया है लेकिन आज भी बरमूडा ट्रायंगल का राज का पता नहीं लग पाया है. हालाँकि वैज्ञानिकों ने इस जगह की बारीकी से जांच कर बरमूडा ट्रायंगल की एक नयी थ्योरी दी है जिससे कई सरे सवालों का जवाब मिल गया है. लेकिन इससे पहले आपको बरमूडा ट्रायंगल के बारे में जानकारी जान लेना जरुरी है ताकि आप भी समझ सकें की इस इलाके को इतना रहस्यमयी क्यूँ कहा जाता है.

बरमूडा ट्रायंगल का इतिहास (Bermuda Triangle History in Hindi)

बरमूडा ट्रायंगल एक ऐसी भयानक जगह है जहाँ पर जाने वाले जहाज या विमान अक्सर अपना रास्ता भटक जाते हैं ऐसा इसलिए होता है क्यूंकि उस जगह पर मैग्नेटिक कम्पास काम करना बंद कर देता है इस वजह से ज़हाज में सफ़र कर रहे यात्री अपनी दिशा का अंदाजा नहीं लगा पाते उसके बाद विमान और ज़हाज कहीं गायब हो जाता है जिसका कारण किसी को भी पता नहीं चल पाता है.

बरमूडा ट्रायंगल का पहला जिक्र Cristopher Coloumbus ने किया था जिसके बारे में उन्होंने अपने जर्नल्स में लिखा था. उन्होंने लिखा था “ट्रायंगल के अन्दर ज़हाज के कम्पास ने काम करना बंद कर दिया था, इसके बाद उन्होंने आसमान में एक अजीब सी रौशनी भी देखी थी”.

सैंकड़ो सालों से शैतानी त्रिकोण लोगों के लिए एक रहस्य बना हुआ है. यहाँ से गुजरने वाले ना जाने कितने समुद्री ज़हाज और विमान खो चुके हैं. ऐसा ही एक हादसा सामने आया था 5 december 1945 को जिसने दुनिया भर के वैज्ञानिकों को हिला कर रख दिया था. अमेरिकन नेवी के 14 पेशेवर पायलट अपने 5 फ्लाइट्स का समूह जिसका नाम फ्लाइट-19 था, एक ट्रेनिंग एक्सरसाइज के लिए बरमूडा ट्रायंगल की तरफ निकले थे. लेकिन सिर्फ एक घंटे 45 मिनट के बाद फ्लाइट लीडर लेफ्टिनेंट चार्ल्स टेलर ने कंट्रोल सेंटर फ़ोन करके बताया की यहाँ कुछ बहुत बड़ी गड़बड़ी है और कहा की उनके एयरक्राफ्ट के तीनों कम्पास ने काम करना बंद कर दिया है. उसने बताया की वो रास्ता भटक गए हैं और उनको दिशा का कोई अंदाजा नहीं लग पा रहा है. यहाँ तक की समुद्र का मंजर भी कुछ अजीब सा दिखाई पड रहा है. यह सब कुछ अजीब सा है.

उसके कुछ देर बाद ही उनका कंट्रोल सेंटर से संपर्क टूट गया. और वो 14 पायलट कहाँ गायब हो गए किसी को नहीं पता. उसी शाम उनको ढूंढने की एक नाकाम कोशिश में एक दूसरा एयरक्राफ्ट भी भेजा गया, लेकिन उड़ान भरने के सिर्फ 27 मिनट बाद ही उसका संपर्क भी कंटोल सेंटर से टूट गया और उस एयरक्राफ्ट में संतुलन बिगड़ने की वजह से विस्फोट हो गया.

इसी तरह मैरी सेलेस्टी नाम का एक व्यापारिक जहाज जो बरमूडा ट्रायंगल क्षेत्र से लापता हो गया था. शुरू में लोगों को यह लगा की ज़हाज समुद्री डाकुओं द्वारा लुट लिया गया है. लेकिन 4 दिसम्बर 1872 को अटलांटिक महासागर में यह जहाज पाया गया. इस ज़हाज के यात्री और कर्मचारी का कोई पता नहीं चला लेकिन जहाज पर कीमती सामानों के सुरक्षित होने से डाकुओं द्वारा ज़हाज को लुट लिए जाने की बात साबित नहीं हो सकी.

1918 में एक और घटना सामने आई थी जिसमे एक बहुत बड़ी USS साईक्लोप्स ज़हाज प्रथम विश्व युद्ध में इंधन आपूर्ति के लिए अमेरिका जा रही थी. इसमें करीब 309 क्रू सदस्य थे और यह भारी माल से भरी हुई थी. यह ज़हाज कभी वापस नहीं आई. इसे ढूंढने की बहुत कोशिश की गयी लेकिन इसे ढूंढा नहीं जा सका.

इसी तरह पिछले 100 सालों में तक़रीबन 20 विमाने और 50 ज़हाज बरमूडा ट्रायंगल में खो चुके हैं जिनका मलबा भी आज तक नहीं मिला है. इनमे करीब 1000 लोग मारे जा चुके हैं. वहां के रहस्यमय हालात और समुद्री जहाज़ों का गायब होने जैसी घटनाएं पिछले लम्बे समय से इंसानी दिमाग के लिए जिज्ञासा का विषय बनी हुई है. इन घटनाओं को देख कर लोगों में कई सारी अफवाएं फैलने लगी की उस जगह पर aliens यानि दुसरे ग्रह के प्राणी वहां पर कब्ज़ा किये हुए हैं. लोगों का मानना है की वहां aliens वास करते हैं और वह अपने क्षेत्र में इंसानों को नहीं आने देना चाहते इसलिए वे उन्हें धरती से गायब कर देते हैं. कुछ लोग ये भी कहते हैं की वहां समुद्री दानव रहता है जो लोगों को निगल जाता है.

बरमूडा ट्रायंगल मिस्ट्री साल्व्ड (Bermuda Triangle Mystery Solved in Hindi)

इस क्षेत्र में जहाजों के गायब होने के कारण पर कई अध्यन हुए. वैज्ञानिकों ने बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य की गुत्थी जो सुलझा लिया है. उनका कहना है की बरमूडा ट्रायंगल में समा जाने वाले विशाल पानी के ज़हाज और हवाई ज़हाज के पीछे किसी भी प्रकार के समुद्र दानव या एलियन का हाथ नहीं था. वैज्ञानिकों ने बताया की पानी के ज़हाज और हवाई ज़हाज के रहस्मयी रूप से गायब होने के पीछे वहां के समुद्री पानी और हवा का हाथ है.

Scientists ने इसके ऊपर काफी अध्यन किया और उनके अध्यन के मुताबिक इस ट्रायंगल के ऊपर खतरनाक हवाएं चलती है. इन हवाओं की गति करीब 274 किमी प्रति घंटे रहती है. जब कोई जहाज और विमान इस हवा की चपेट में आता है तो वो अपना संतुलन खो बैठता है. जिसके कारण उनका जहाज पानी के अन्दर डूब जाता है. ये हवाएं इसके ऊपर बनने वाले बादलों के कारण चलती है. इन बादलों को जानलेवा बादल भी कहा जाता है क्यूंकि ये काफी घने होते हैं जिसके अन्दर भयंकर तूफान भी उठते हैं. जैसे इन बादलों के अन्दर विमान चले जाते हैं तो वो अपना संतुलन खो देते हैं जिसकी वजह से ज्यादातर विमान में विस्फोट हो जाता है.

वैज्ञानिको द्वारा ये बताया जाता है की इन जानलेवा बादलों का दायरा 20 से 55 मिल तक का होता है जिनसे गुजरना वाकई खतरों से भरा काम है. वैज्ञानिको का ये भी दावा है की इस द्वीप पर कई एयर बम हैं जो हेक्सागोनल क्लाउड्स के वजह से बनते हैं. इनकी वजह से यहाँ की हवाएं काफी तेज गति से चलती है और इसी कारण वहां की उठने वाली लहरें दैत्याकार होती हैं. उन लहरों की ऊंचाई 100 फीट से भी ज्यादा ऊँची होती है. इस दौरान जो कुछ भी इनकी चपेट में आता है तो या तो उसमे विस्फोट हो जाता है या फिर वो समुद्र में समा जाते हैं. कहा जाता है की धरती के जिस हिस्से में बरमूडा ट्रायंगल स्थित है वहां काफी तेज चुम्बकीय शक्ति मौजूद है. इसकी वजह से जो कुछ भी इसके नजदीक जाता है वो तेजी से समुद्र के अन्दर चला जाता है.

उन्होंने ये भी कहा की बरमूडा ट्रायंगल के आस पास एक विशेष प्रकार का कोहरा छाया रहता है जिसमे ज़हाज भटक जाते हैं. जहाजो के गायब होने का एक और कारण यह भी बताया जाता है की इस क्षेत्र में मीथेन गैसों का भण्डार है. इससे पानी का धनत्व कम हो जाता है और ज़हाज धीरे धीरे पानी में समाने लगता है. ये गैस आसमान में उड़ने वाले ज़हाज को भी अपनी चपेट में ले लेती है. मीथेन गैस की वजह से वहां इलेक्ट्रोमैग्नेटिक anomalies होती है जिसके कारण वहां कम्पास काम करना बंद कर देता है.

बरमूडा ट्रायंगल की ही तरह ना जाने हमारे दुनिया में कितनी रहस्मयी जगह मौजूद है जिसको सुलझा पाना बहुत मुश्किल है. आज के युग को को विज्ञान का युग कहा जाता है क्यूंकि दुनिया की सभी अनसुलझी पहेली को विज्ञान अपने तरीके से सुलझा ही लेती है. लेकिन फिर भी बहुत से ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब स्वयं विज्ञान के भी पास नहीं हैं. उम्मीद है की आपको ये लेख बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य क्या है (Bermuda Triangle Mystery in Hindi) पसंद आएगा. इस लेख को अपने दोस्तों के साथ ज्यादा से ज्यादा शेयर जरुर करें.

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