बसंत पंचमी पर निबंध – कब है और क्यों मनाया जाता है?

बसंत पंचमी पर निबंध (Essay on Basant Panchami in Hindi): नए साल की शुरुआत हो गई है और साल के पहले महीने जनवरी में तरह तरह के त्यौहार देखने को मिलते हैं जिनमे मकर संक्रांति, लोहरी और पोंगल जैसे ख़ास पर्व मनाये जाते हैं. इनमे से एक और मशहुर त्यौहार है जिशे देश भर में पुरे उल्लास और ख़ुशी के साथ मनाया जाता है, इस त्यौहार को बसंत पंचमी (Basant Panchami) कहा जाता है. बसंत पंचमी हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार है, पश्चिमी भारत में ये वसंत पंचमी के नाम से भी जाना जाता है.

बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती की भी पूजा अर्चना की जाती है, इसके पीछे का क्या कारण है और इस पर्व का महत्व क्या है इन सभी के बारे में आज हम आपको इस लेख बसंत पंचमी पर निबंध हिंदी में के जरिये बताने वाले हैं. इसके अलावा विध्यालयों में अध्यापक बच्चों को बसंत पंचमी के ऊपर निबंध, अनुच्छेद और भाषण लिखने के लिए भी कहते हैं तो इस लेख से उन छात्रों को भी काफी मदद मिलेगी.

बसंत पंचमी पर निबंध – Essay on Vasant Panchami in Hindi

Vasant Panchami Par Nibandh Hindi
बसंत पंचमी पर छोटा निबंध

भारतवर्ष में पुरे साल में छह मौसम होते हैं इनमे से बसंत का मौसम सबसे मनचाहा मौसम होता है. जैसा की हम सब जानते हैं की पतझड़ के बाद बसंत ऋतू का आगमन होता है और बसंत ऋतू को ऋतुओं का राजा भी कहा जाता है. स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने यह बात कही थी की ऋतुओं में मैं बसंत हूँ. इसमें प्रकृति का सौंदर्य सभी ऋतुओं से बढ़कर होता है. इस महीने में फूलों पर बहार आ जाती है, खेतों में सरसों का सोना चमकने लगता है, जौ और गेहूं की बालियाँ खिलने लगती है, आम के पेड़ों पर बौर आ जाते हैं और हर तरफ रंगबिरंगी तितलियाँ मंडराने लगती हैं. इसलिए बसंत ऋतू का स्वागत करने हेतु माघ महीने की शुक्ल पंचमी को एक बड़ा जश्न मनाया जाता है, जिसमे विष्णु और कामदेव की पूजा होती है, यह बसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता है.

इस ख़ास दिन पर माँ सरस्वती का भी जन्म हुआ था इसलिए बसंत पंचमी के अवसर पर सरस्वती पूजा भी की जाती है. माँ सरस्वती की पूजा लोग धूम धाम से मनाते हैं और उन्हें पुरे सच्चे मन से पूजते हैं. बसंत पंचमी भारत के हर राज्य में अलग अलग तरीके से मनाया जाता है, कोई इसे माँ सरस्वती जिन्हें कला, संगीत और ज्ञान की देवी कहते हैं उनके जन्मोत्सव के रूप में मनाते है, तो कोई इस दिन भगवान कामदेव जिन्हें प्रेम का देवता माना जाता है उनकी पूजा करते हैं और अपने प्रिय लोगों को याद करते हैं और कोई बसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र पहनकर पतंग उड़ाने की प्रतियोगिता में भाग लेते हैं.

बसंत पंचमी का अर्थ इसके नाम से ही पता लगता है की बसंत ऋतू के पाँचवे दिन पर इस पर्व को मनाने का रिवाज है, मतलब बसंत पंचमी बसंत ऋतू के पांचवे दिन पर मनाया जाता है. पुराणों, शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों में इसका अलग अलग ढंग से विवरण मिलता है. जिनमे से एक कथा बहुत प्रचलित है. इस कथा के अनुसार सृष्टी के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनी की रचना की. अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे, उन्हें लगता था की कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया रहता है. जब सृष्टी की उत्पत्ति हुई थी तो वातावरण में चारों ओर निराशा, उदासी छाई थी और संसार में कोई खुस नहीं था. ऐसा माहौल देखकर ब्रह्मा जी को काफी दुःख हुआ. तब भगवान विष्णु से अनुमति प्राप्त कर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल ले कर पृथ्वी पर छिड़का, जलकण बिखरते ही इसमें कंपन होने लगा.

इसके बाद वृक्षों के बिच से एक अद्भुत शक्ति का प्रकट हुआ, यह शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था जिसके एक हाथ में विणा तथा दुसरे हाथ वर मुद्रा में थे, अन्य दोनों हाथ में पुस्तक एवं माला थी. ब्रह्मा ने देवी से विणा बजाने का अनुरोध किया. जैसे ही देवी ने विणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जिवजंतुओं को वाणी प्राप्त हो गई. जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया. पवन चलने से सरसराहट होने लगी.

जिससे सृष्टि में फैली हुई उदासी दूर हो गई और चारों ओर हर्ष और उल्लास फ़ैल गया. तब ब्रह्मा ने उस देवी को वाणी की देवी “सरस्वती” कहा. इसलिए देवी सरस्वती को ज्ञान और बुद्धिमता के देवी का दर्जा भी दिया जाता है और इसी वजह से इस दिन को सरस्वती पूजा के रूप में भी मनाया जाता है. सरस्वती को बागीश्र्वरी, भगवती, शारदा, विणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है. ये विद्या और बुद्धि प्रदाता है.

बसंत पंचमी का महत्व

बसंत ऋतू आते ही प्रकृति का कण कण खिल उठता है. मानव तो क्या पशु-पक्षी तक उल्लास से भर जाते हैं. हर दिन नइ उमंग से सूर्योदय होता है और नइ चेतना प्रदान कर अगले दिन फिर आने का आश्र्वासन देकर चला जाता है. यूँ तो माघ का यह पूरा मास ही उत्साह देने वाला है, पर बसंत पंचमी का उत्सव भारतीय जनजीवन को अनेक तरह से प्रभावित करता है. भारत वर्ष में जहाँ जहाँ खेती बाड़ी होती है वहां वहां इस त्यौहार का विशेष महत्व है. किसान इस त्योहार को बहुत महत्व देते हैं क्योंकि उनकी फसलों से पुराने पत्ते गिरते हैं और उसकी जगह नए पत्ते उगते हैं.

प्राचीनकाल से ही बसंत पंचमी के अवसर पर ज्ञान और कला की देवी माँ सरस्वती का जन्मदिवस मनाया जाता है, जो शिक्षावादी भारत और भारतीयता से प्रेम करते हैं, वे इस दिन माँ शारदा की पूजा कर उनसे और अधिक ज्ञानवान होने की प्रार्थना करते हैं. जो महत्व सैनिकों के लिए अपने शस्त्रों और विजयादशमी का है, जो विद्वानों के लिए अपनी पुस्तकों और व्यास पूर्णिमा का है, जो व्यापारियों के लिए अपने तराजू, बाट, बहीखातों और दीपावली का है वही महत्व कलाकारों के लिए बसंत पंचमी का है. चाहे वे कवी हों या लेखक, गायक हो या वादक, नाटकार हो या नृत्यकार, सब दिन का प्रारंभ अपने उपकरणों की पूजा और माँ सरस्वती की वंदना से करते हैं.

बसंत पंचमी को श्री पंचमी के नाम से भी जाना जाता है. इस समय शरद ऋतू ख़त्म होने लगती है और पेड़ों पर नए पत्ते और फुल उगने लगते हैं. बसंत पंचमी के दिन ही हिन्दुओं के अनुसार बच्चों के शिक्षण कार्य की शुरुआत की जाती है. इस दिन बच्चे से पहला अक्षर लिखवाया जाता है.

बसंत पंचमी कितने तारिख को है (Basant Panchami Dates)

बसंत पंचमी मैं संगीत और विद्या की देवी माता सरस्वती की पूजा होती है, इसके साथ साथ विध्यार्थियों के लिए भी यह त्यौहार बहुत आनंददायक होता है क्योंकि इस पर्व को भारत के सभी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय में बहुत ही सुंदर तरिके से पारंपरिक रूप से मनाया जाता है और सभी छात्र पूजा के बाद माँ सरस्वती से आशीर्वाद लेते हैं. भारत में जनवरी और फरवरी के बिच में इस ऋतू का आगमन होता है.

ऐसे में बहुत से छात्रों के मन में ये सवाल आता है की 2020 का बसंत पंचमी कब है या 2020 में बसंत पंचमी को कौन सी तारीख है? इस साल बसंत पंचमी 2020 में 29 जनवरी, बुधवार को मनाया जायेगा. यह पर्व माघ महीने के शुक्ल पंचमी के दिन मनाया जाता है. इस दिन पतझड़ का मौसम ख़त्म होकर हरियाली का प्रारंभ होता है.

बसंत पंचमी क्यू मनाया जाता है?

बसंत पंचमी को जीवन की शुरुआत का दिन भी माना जाता है. इस दिन का मुहूर्त सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है. इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, शिक्षा संस्थानों का उद्घाटन इत्यादि के लिए एक दम उत्तम समय माना जाता है. इस दिन सभी मनुष्यों को शाकाहारी भोजन ही करना चाहिए. बसंत पंचमी हमें जीवन, ज्ञान, चेतना, हर्ष, प्यार, दया, त्याग, तप करना सिखाती है.

यह त्यौहार विभिन्न धर्मों और राज्यों के लोगों द्वारा मनाया जाता है. बसंत पंचमी भारत के उत्तरीय राज्य, मध्य और पश्चिमी भाग में हिन्दू और सिख द्वारा ख़ास तरीके से मनाया जाता है. पंजाब राज्य में सभी लोग बसंत के समय पीले वस्त्र पहनते हैं इसके अलावा पिली सरसों और पिली चावल का भोजन भी करते हैं. इस पवित्र दिन पर नेपाल, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम के लोग माँ सरस्वती जी के मंदिर जाते हैं और उनकी पूजा करते हैं.

बसंत पंचमी के ही दिन आन्ध्र प्रदेश में श्री पंचमी के रूप में उत्सव मनाया जाता है. भारत के अन्य राज्य जैसे मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र में सुबह सुबह पवित्र नदियों में स्नान करके शिव-पार्वती का पूजन करते हैं और बसंत में उगने वाले सभी चीजें अर्पित करते हैं. देश के विभिन्न हिस्सों में लोग पतंग उड़ाते हैं जो इस अद्भुत त्यौहार को मनाने का सबसे अच्छा तरीका है.

बसंत ऋतू प्रकृति का उपहार है. बसंत का आगमन का प्रभाव प्रकृति पर ही नहीं बल्कि मानव के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है. यह बिमारियों को दूर भगाने का काल है. इस ऋतू में मछरों तथा अन्य हानिकारक कीटाणुओं का प्रकोप घट जाता है. इस ऋतू में प्रातः काल खुली हवा में टहलना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक होता है. इससे पाचन शक्ति बढती है और शारीर निरोग रहता है.

मुझे उम्मीद है की आपको ये लेख “बसंत पंचमी पर निबंध (Essay on Basant Panchami in Hindi)” पसंद आएगा साथ इस त्यौहार को मनाने के पीछे का क्या कारण है ये भी आपको पता चल गया होगा. बसंत पंचमी या बसंत ऋतू की कौनसी बात आपको सबसे ज्यादा अच्छी लगती है ये आप हमें निचे कमेंट कर जरुर बताइए, हमें आपकी बातें सुनकर अच्छा लगेगा. इस लेख में अगर कुछ गलती हो तो भी हमें जरुर बताइए ताकि हम अपनी गलती को सही समय पर सुधार कर सकें. इस लेख को अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ ज्यादा से ज्यादा share करें.

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